राज्यपाल ने कहा, “वे लखनऊ विश्वविद्यालय के अनेक कार्यक्रमों एवं उद्घाटन समारोह में आ चुके हैं, लेकिन आज (मंगलवार) के कार्यक्रम की कुछ विशेषता है, जैसे भगवान राम के नाम के पहले सीता का नाम तथा श्रीकृष्ण के नाम के पहले राधा के नाम का कुछ अलग आनंद है। उसी प्रकार आज सभागार का नाम उमा-हरिकृष्ण अवस्थी रखा गया है। प्रो. अवस्थी ने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय से कुलपति के तौर पर कोई मानदेय नहीं लिया। परिजनों द्वारा सभागार के निर्माण कार्य का व्यय उठाना अपने आप में एक संदेश है।”
नाईक ने कहा, “इस बात का अनुभव बहुत कम मिलता है कि प्रो. अवस्थी लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे, छात्रसंघ के निर्विरोध अध्यक्ष रहे, फिर विश्वविद्यालय में शिक्षक बने और बाद में कुलपति भी रहे। उनके जीवन का लंबा समय लखनऊ विश्वविद्यालय के साथ जुड़ा रहा। वे 36 वर्षो तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी रहे जो अपने आप में एक मिसाल है।”
वहीं, सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा में कहा कि दिवंगत प्रो. हरिकृष्ण अवस्थी के जीवन को भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रो. अवस्थी ने आजीवन परोपकार और दूसरों को आगे बढ़ाने का काम किया है।
dharmpath.com dharmpath