कोलकाता, 8 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने शनिवार को उत्तरी 24 परगना जिले के बसीरहाट प्रखंड में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह जांच कलकत्ता उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में होगा।
फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर तीन जुलाई को बादुरिया में दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी।
फेसबुक पर यह पोस्ट लगाने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बीच हिंसक भीड़ ने दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की, वाहनों को आग लगा दी, जिसमें पुलिस के वाहन भी शामिल थे और सड़क जाम कर दिया। हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
ममता ने यहां राज्य सचिवालय भवन में पत्रकारों से कहा, “हम बादुरिया-बसीरहाट हिंसा की न्यायिक जांच करवाएंगे, ताकि कानून के मुताबिक पक्षपातरहित कार्रवाई हो सके। हमें हिंसा में शामिल ताकतों के बारे में पता है। हम अफवाह फैलाने में मीडिया की संलिप्तता की जांच भी करवाएंगे।”
उन्होंने कहा कि जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग को सभी प्रशासनिक मदद दी जाएगी।
साथ ही ममता ने बादुरिया-बसीरहाट वासियों की साजिश में शामिल न होने के लिए सराहना भी की, जबकि ‘उन्हें हथियार मुहैया कराने की पेशकश कर साजिश में शामिल करने की साजिश थी’।
अफवाह फैलाने वालों की आलोचना करते हुए ममता ने कहा, “मैं फेसबुक के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि ‘फेकबुक’ के खिलाफ हूं।”
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर इलाके में हिंसा में शामिल होने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा, “भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यालयों में आग लगा दी। हमने दो संगठनों को काली सूचि में डाल दिया है। भाजपा पूरे देश को बर्बाद कर रही है। वे कश्मीर में नियंत्रण हासिल नहीं कर सके और उसकी बजाय विद्रोह की भावना भड़का दी है।”
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