केंद्र की नाकामी का बंगाल सबसे बड़ा भुक्तभोगी : ममता बनर्जी

कोलकाता, 17 जुलाई (आईएएनएस)। पड़ोसी देशों चीन, नेपाल तथा बांग्लादेश के साथ भारत के संबंधों के ‘बिगड़ने’ पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘कूटनीतिक नाकामी’ का उनका राज्य ‘सबसे बड़ा भुक्तभोगी’ रहा है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, “बंगाल बीच में पिस गया है, इसलिए हम सर्वाधिक भुक्तभोगी हैं। बंगाल की सीमा भूटान, नेपाल तथा बांग्लादेश से लगती है। हम बांग्लादेश के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं।”

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “अगर सिक्किम पर चीन का कब्जा हो जाता है..सिक्किम तथा दाजिर्लिग के बीच कोई फर्क नहीं है, क्योंकि वे पूरी तरह जुड़े हुए हैं..सिलिगुड़ी कॉरिडोर चिकन नेक है। केंद्र सरकार की गलती और कूटनीतिक रूप से निपटने में नाकामी के कारण पड़ोसियों के साथ संबंध बिगड़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने बांग्लादेश, नेपाल तथा चीन के साथ ही भूटान से भी संबंधों को बिगाड़ लिया है।”

उन्होंने कहा, “वे सीमा एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं..हम सबसे बड़े भुक्तभोगी हैं। हम परिस्थितियों के पीड़ित हैं। बंगाल, बांग्लादेश, नेपाल तथा भूटान का द्वार है।”

मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में सीमा पर भारत तथा चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच की है।

बंगाल की मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सीमाओं को खोलने के लिए खुफिया एजेंसियों की केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत है।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) कहां है? सीमाएं क्यों खुली हैं? यहां सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी), खुफिया ब्यूरो (आईबी), रॉ क्या कर रहे हैं? जमात से जुड़े लोगों को अंदर घुसने की इजाजत कैसे दी जा रही है?”

ममता ने कहा, “मैंने विदेश मंत्रालय से बातचीत की है..भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबद्ध एक संस्था ने यहां शेख हसीना (बांग्लादेश की प्रधानमंत्री) का पुतला क्यों फूंका? विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की दुर्गा वाहिनी के नाम पर बंदूक चलाने का प्रशिक्षण क्यों दिया जा रहा है?”

उन्होंने कहा, “मेरे पास वीडियो है। असम में मुठभेड़ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है..यहां तक कि जम्मू में भी। क्या यही सरकार का काम है? या सरकार एक समानांतर सरकार चलाएगी..कभी गोरक्षा के नाम पर तो कभी वाहिनी के नाम पर? हर एजेंसी इसका समर्थन कर रही है। मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है।”

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