भारत ने चीन से सैनिकों को हटाने को कहा (लीड-2)

नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुवार को चीन से कहा कि यदि वह चाहता है कि भारत इलाके से अपने सैनिकों को हटा ले, तो चीन अपने सैनिकों को भूटान-चीन सीमा पर डोकलाम से हटाए।

नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुवार को चीन से कहा कि यदि वह चाहता है कि भारत इलाके से अपने सैनिकों को हटा ले, तो चीन अपने सैनिकों को भूटान-चीन सीमा पर डोकलाम से हटाए।

करीब महीनेभर से चल रहे गतिरोध पर पहली भारतीय विस्तृत टिप्पणी में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन पर एकतरफा भूटान से लगी सीमा पर यथास्थिति बदलने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

उन्होंने राज्यसभा में कहा, “इसी वजह से भारतीय व चीनी सीमा में गतिरोध बढ़ा है।”

सुषमा ने कहा कि चीन कह रहा है कि भारत को बातचीत शुरू करने के लिए डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए, जबकि ‘हम कह रहे हैं कि यदि संवाद होना है तो दोनों को अपने सैनिकों को हटाना चाहिए।’

उन्होंने कहा, “चीन की कार्रवाई हमारी सुरक्षा को चुनौती है।”

सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत कुछ भी अनुचित नहीं कर रहा है।

यह गतिरोध करीब एक महीने पहले शुरू हुआ जब भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों को भारत, भूटान और चीन तिराहे पर सड़क निर्माण करने से रोका।

इससे चीन-भारत के समझौतों पर गंभीर असर पड़ा है। साथ ही चीनी विशेषज्ञों ने भारत के नहीं हटने पर युद्ध की चेतावनी दी है।

सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया कि चीन एक लिखित समझौते की शर्तो का उल्लंघन कर रहा है, जो भारत, चीन और भूटान के बीच 2012 में हुआ था।

स्वराज ने कहा, “पिछले कुछ सालों में चीन तिराहा बिंदुओं के अंतिम छोर के करीब से करीब तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। यह सड़कों की मरम्मत, उन्हें बनाने और इसी तरह की दूसरी चीजों के जरिए हो रहा है।”

उन्होंने बताया कि 16 जून की घटना में ऐसा क्या हुआ जिससे गतिरोध बढ़ा।

सुषमा ने कहा, “इस बार वे बुल्डोजर और निर्माण उपकरणों के साथ उस बिंदु के उल्लंघन के मकसद से आए थे, जहां तिराहा खत्म होता है। यह हमारी सुरक्षा के लिए खतरा है।”

उन्होंने कहा कि इस बार चीन एकतरफा सिक्किम-तिब्बत-भूटान तिराहा पर यथास्थिति को बदलना चाहता है।

उन्होंने कहा, “जब तक यह चीन और भूटान के बीच सीमा का विवाद था, हमें कोई समस्या नहीं थी। लेकिन जब यह तिराहे पर आता है तो हमारे हित इससे प्रभावित होते हैं।”

उन्होंने कहा, “वे बटांग ला में आना चाहते हैं। यदि चीन एकतरफा तिराहे पर यथास्थिति को बदलाना चाहता है तो यह हमारी सुरक्षा को सीधा खतरा है।”

उन्होंने कहा, “कई देश हमारे साथ हैं। उनका मानना है कि चीन भूटान जैसे एक छोटे देश के साथ आक्रामकता दिखा रहा है। भूटान ने विरोध किया है, उसने लिखित विरोध भी किया है। सभी देश मानते हैं कि भारत अपनी जगह सही है और कानून हमारे साथ है।”

चीन के वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) परियोजना पर सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत ने शुरुआत से ही इसका विरोध किया है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरने वाले चीन पाकिस्तान इकोनामिक कोरिडोर का जिक्र करते हुए सुषमा ने कहा, “जैसे ही हमें पता चला कि वे ओबीओआर के हिस्से के तौर पर सीपीईसी बना रहे हैं, हमने अपना विरोध दर्ज कराया।”

उन्होंने कहा कि चीन बंदरगाह और दूसरी सुविधाएं भारत की समुद्री सीमा के करीब बना रहा है।

उन्होंने कहा कि वे जिबूती में सैन्य तंत्र सुविधा विकसित कर रहे है। उन्होंने म्यांमार के कयुकपयु, श्रीलंका के हंबनटोटा व बलूचिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह विकसित कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा, “यह कहना सही नहीं होगा कि भारत को घेरा जा रहा है, सही नहीं है। भारत अपनी सुरक्षा को लेकर सर्तक है। कोई शक्ति हमें घेर नहीं सकती।”

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