भोपाल, 30 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में खादी को प्रोत्साहित करने के लिए कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग, मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम और रेशम संचालनालय ने खुद ही पहल करने का फैसला लिया है। इसके लिए विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी हर सोमवार को खादी के वस्त्र पहनेंगे। इसके अलावा अन्य दिन भी खादी के वस्त्र पहने जा सकते हैं।
विभागीय समीक्षा बैठक में बुधवार को कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री अंतर सिंह आर्य ने कहा कि ईको फ्रेंडली खादी वस्त्रों को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग स्वयं से ही शुरुआत करेगा। सप्ताह में एक दिन खादी पहनने के निर्णय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मुक्त रहेंगे।
आर्य ने कहा कि किसी भी घटक की बजट राशि लेप्स नहीं होनी चाहिए। खादी वस्त्रों को जीएसटी से मुक्त कराने के लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को भी पत्र लिखा जाएगा।
बैठक में बताया गया कि कुटीर एवं ग्रामोद्योग, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना के प्रकरणों में आगे हैं। शिल्पियों को आधुनिक परिवेश से जोड़ने के लिए ग्वालियर एवं जबलपुर में निट भोपाल के माध्यम से ई-कॉमर्स मार्केटिंग में प्रशिक्षण दिलवाया गया है।
चंदेरी, बाघ, कोसा, खादी आदि की लोकप्रियता और शिल्पियों को बाजार उपलब्धता के मद्देनजर मुंबई, पुणे, चेन्नई, भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, नीमच, चंडीगढ़, बेंगलुरू, रायपुर, जहांगीर आर्ट गैलरी एवं कोल्हापुर में प्रदर्शनियां लगाई गई।
प्रमुख सचिव वीरा राणा ने बताया, “प्रदेश के शिल्प उत्पादों के लिए ‘क्राट-मार्क’ प्राप्त किया गया है, जिससे उत्पादों की विश्वसनीयता विश्व स्तर पर बढ़ी है। चंदेरी, सारंगपुर, महेश्वर, वारासिवनी के युवाओं को बुनकर सेवा केंद्र वाराणसी में प्रशिक्षण दिलवाया गया है।”
बैठक में खादी बोर्ड की महाप्रबंधक मधु खरे, हाथकरघा की आयुक्त एवं प्रबंध संचालक हस्तशिल्प सोनाली वायंगणकर भी मौजूद थी।
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