बागी विधायकों ने खुद ही अपने आप को एआईडीएमके से अलग किया : धनपाल

चेन्नई, 19 सितम्बर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल ने कहा कि अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 18 बागी विधायकों ने खुद ही अपने आप को पार्टी से ‘अलग’ कर लिया था और ‘द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के साथ सहयोग करने के अलावा वे सभी पार्टी से बाहर के व्यक्ति के नियंत्रण में आ गए थे।’ ऐसा कर उन्होंने ‘खुद ही, स्वेच्छा से एआईएडीएमके की सदस्यता त्याग दी।’

धनपाल ने इन विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के अपने 22 पन्नों के आदेश के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय और अन्य अदालतों के दल-बदल कानून के संबंध में दिए गए फैसलों व इस संबंध में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा बनाए गए नियमों का हवाला दिया।

धनपाल ने यह फैसला एआईएडीएमके के मुख्य सरकारी सचेतक एस. राजेंद्रन की याचिका पर दिया है। यह 18 विधायक पार्टी में हाशिये पर डाले गए नेता टी.टी.वी.दिनाकरन के समर्थक हैं। विधानसभा अध्यक्ष धनपाल ने अपने फैसले में कहा कि इन विधायकों द्वारा राज्यपाल को इस आशय का ज्ञापन देना कि उन्होंने मुख्यमंत्री पलनीस्वामी में विश्वास खो दिया है, उस पार्टी की सदस्यता को स्वेच्छा से त्यागने के समान है जिसके चुनाव चिन्ह पर वे निर्वाचित हुए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने अपने आदेश में कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि इन विधायकों का कार्य एकतरफा था और जिससे यह साफ हुआ कि वे लोग जिस पार्टी में थे, उसकी सदस्यता खुद ही, स्वेच्छा से छोड़ना चाहते थे।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के बालचंद्र एल जारकीहोली व अन्य बनाम बी.एस. येदुरप्पा व अन्य के मामले (2011) का हवाला देते हुए बागी विधायकों की इस दलील को नामंजूर कर दिया कि उनलोगों ने स्वेच्छा से अपनी सदस्यता नहीं छोड़ी है और राज्यपाल से मुलाकात करने का मतलब यह नहीं है कि वे लोग अपनी सदस्यता छोड़ रहें हैं या पार्टी से अलग हो रहें हैं।

एस. राजेंद्रन ने यह दलील दी थी कि बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री पर फर्जी आरोप लगाकर स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी जिन्हें निर्विरोध विधायक दल का नेता चुना गया था। उनलोगों ने पार्टी के निर्णयों से अलग होकर अलग विचारधारा अपनाकर पार्टी को शर्मिदा किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वास्तव में वे लोग एक ओर दावा कर रहे हैं कि वे पार्टी के हक में काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे पार्टी में अधिकांश विधायकों के साथ नहीं हैं। इससे वे लोग खुद ही साबित करते हैं कि वे पार्टी का हिस्सा नहीं थे।

उन्होंने अपने फैसले के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि विधायकों का यह मानना कि वे लोग राज्यपाल से मिले थे और उन्हें यह बताया था कि मुख्यमंत्री के प्रति वे अपना विश्वास खो चुके हैं, खुद ही उन्हें अयोग्य साबित करता है।

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