बसपा अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि इस मामले में बीएचयू के कुलपति जी.सी. त्रिपाठी का रवैया भी छात्र-छात्रा हितैषी न होकर काफी अड़ियल व तानाशाही पूर्ण लगता है। उनके आपत्तिजनक बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है।
उन्होंने कहा, “बीएचयू की छात्राएं अपनी सहपाठी छात्रा के साथ छेड़खानी के मामले का विरोध कर रही थीं, लेकिन कुलपति के भड़काऊ रवैये के कारण छात्रों का आंदोलन तीव्र हुआ और अंतत: वे पुलिस की जुल्म-ज्यादती के शिकार हुए।”
मायावती ने कहा कि बसपा कुलपति के छात्र-विरोधी रवैये व आधी रात को छात्राओं पर पुलिस लाठीचार्ज, दोनों की तीव्र निंदा करती है और सरकार से मांग करती है कि वह छात्र-छात्राओं के साथ न्याय सुनिश्चित करे व उनकी सुरक्षा का समुचित प्रबंध करे।”
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