भोपाल, 28 सितंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश की सरकार पर कांग्रेस ने हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार अब प्रदेश की जनता की सर्वोच्च अदालत विधानसभा की अवमानना पर उतर आई है। यही कारण है कि विधानसभा में पुरस्थापित विधेयक होने के बावजूद उसने अध्यादेश लाने का फैसला ले लिया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में 27 सितंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी विधेयक 1960 की धारा दो में प्रशासक की परिभाषा को बदलने के संबंध में अध्यादेश लाने का निर्णय लिया है, जबकि यह विधेयक विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र में 26 जुलाई को पुरस्थापित किया जा चुका है। कैबिनेट का फैसला सदन की अवमानना है।
सिंह ने आगे कहा कि इस मामले में वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और समूचे मंत्रिमंडल के खिलाफ सदन की अवमानना करने पर विशेषाधिकार भंग का प्रस्ताव लाएंगे।
नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि चहेतों को उपकृत करने के लिए शिवराज सरकार जहां कैबिनेट जैसी शीर्षस्थ संस्था का न केवल दुरुपयोग कर रहे हैं, बल्कि इसके जरिए विधानसभा जैसी संस्था की गरिमा भी कम कर रही हैं। चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद जो मंत्रिमंडल नीतिगत, प्रदेश और जनहित के फैसलें लेने वाला फोरम था, उसे मुख्यमंत्री ने निज हित साधने वाली संस्था बना दिया है।
सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री को सहकारी संस्थाओं में न जाने किन अशासकीय लोगों को मनोनीत करने की जल्दबाजी है कि उन्होंने विधानसभा में पेश हो चुके विधेयक पर अध्यादेश लाने का निर्णय ले लिया। ऐसा करते हुए उन्होंने विधानसभा की सीधे अवमानना की है। यह विधेयक सदन की संपत्ति है। इस पर कोई भी निर्णय सदन के अंदर ही हो सकता है, सदन के बाहर नहीं।
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