नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर ‘भ्रष्टाचार की रक्षा और अमीरों को धनशोधन करने की इजाजत देने’ के लिए एक के बाद एक कदम उठाने का आरोप लगाया।
माकपा के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ में लिखे संपादकीय में यह बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि ये उन लोगों ( भाजपा) द्वारा जनता के बीच दिए जाने वाले ‘काले धन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर निर्णय’ जैसे बयानों का विरोधाभासी है।
संपादकीय के अनुसार, मोदी सरकार ने बिना पैन और आधार कार्ड दाखिल किए आभूषण खरीदने की उपरी सीमा 2 लाख तक बढ़ा दी है।
इससे पहले अगस्त में सरकार ने धनशोधन रोकथाम अधिनियम में संशोधन कर 50,000 से ज्यादा आभूषण खरीदने के लिए आधार और पेन कार्ड जरूरी कर दिया था।
इसका मतलब था कि 50,000 से ज्यादा सोना या किसी भी प्रकार का आभूषण खरीदने पर कड़ाई से ‘अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी)’ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इस संशोधन का उद्देश्य काले धन को वैध बनाने के लिए सोना और आभूषणों की खरीद को रोकना था।
जर्नल के अनुसार, इन उपायों को कम करके, सरकार काले धन के खिलाफ कार्रवाई के अपने ही दावे की हैसियत को कम कर रही है।
संपादकीय के अनुसार, “दो लाख से कम के आभूषणों के लगातार ट्रांजैक्शन से काले धन को वैध बनाने और धनशोधन में सहायता मिलेगी। इस कदन से संकेत दिया गया है कि धनवान कर चोरी कर सकते हैं और सरकारी मेहरबानी से काले धन को बदल सकते हैं। जबकि, गरीब को राशन के सामान जैसी बुनियादी चीजों के लिए भी आधार से जोड़ने जैसी कड़ी शर्तो से गुजरना होगा।”
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