श्रीनगर, 6 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्र की तरफ से नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने अलगाववादियों के बहिष्कार के बीच सोमवार को कश्मीर मसले पर वार्ता शुरू कर दी और गेस्ट हाउस में उच्चस्तरीय सुरक्षा के बीच पांच से ज्यादा गैर-राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
यह वही गेस्ट हाउस है जो 1990 के दशक में आतंकवाद के चरम के दिनों में सुरक्षाबलों द्वारा पूछताछ केंद्र के रूप में इस्तेमाल होता था।
जानकार सूत्रों के अनुसार, गुपकर रोड स्थित हरी निवास गेस्ट हाउस में गुज्जर जनजाति और बकरवाल संगठनों, पर्यटक ऑपरेटरों, शिकारा मालिकों, फल व केसर उत्पादकों और शिल्पकारों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की।
कश्मीर मसले पर बातचीत के लिए केंद्र सरकार के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा सोमवार को पांच दिवसीय दौरे पर कश्मीर पहुंचे। जम्मू एवं कश्मीर में 1992-94 में जब आतंकवाद अपने चरम पर था, उस समय शर्मा यहां खुफिया ब्यूरो के सहायक निदेशक थे।
कैबिनेट सचिव का दर्जा प्राप्त शर्मा जैसे ही श्रीनगर पहुंचे, उन्हें जेड श्रेणी सुरक्षा मुहैया कराई गई।
सूत्रों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान अपनी समस्याओं को बताया। शर्मा ने लोगों की समस्या को ‘धर्यपूर्वक’ सुना।
बहुस्तरीय वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के लिए हो रहे इस दौरे के पहले दिन किसी भी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि शर्मा से मुलाकात करने नहीं आया।
विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस ने कहा कि उसे शर्मा की तरफ से अभी कोई निमंत्रण नहीं मिला है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, नए मध्यस्थ विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों, बुद्धिजीवियों के साथ चर्चा के लिए तीन दिनों तक घाटी में रहेंगे, जबकि बाकी दो दिन वह जम्मू क्षेत्र में रहेंगे।
अलगाववादी नेताओं का समूह संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) पहले ही मध्यस्थ के साथ किसी भी तरह की वार्ता की संभावना को खारिज कर चुका है। जेआरएल में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासीन मलिक शामिल हैं। जेआरएल ने कुछ दिन पहले एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि शर्मा की नियुक्ति ‘अंतर्राष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय मजबूरी’ की वजह से अपनाई गई रणनीति का हिस्सा है और वे शर्मा से नहीं मिलेंगे।
अलगाववादी समूह के सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने सैयद अली गिलानी को वार्ताकार से मुलाकात के लिए मनाने का प्रयास किया है।
सूत्रों के मुताबिक, “गिलानी साहब वार्ता प्रक्रिया का विरोध नहीं करते हैं लेकिन वह ऐसी किसी भी प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं है, जिसका उद्देश्य बुनियादी मुद्दे को सुलझाने के बजाए उसमें देरी करना है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा था कि उन्हें वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के इस नए प्रयास से अधिक उम्मीदें नहीं हैं।
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