नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सव विशेष रूप से कोरियोग्राफ किए वंदे मातरम के साथ शुरू हुआ। इसके जरिए जहां मातृभूमि को नमन किया गया, वहीं इस नृत्य शैली के जरिए ध्यान, योग, संगीत और नृत्य की अवधारणा को जोड़ने की कोशिश की गई।
आयोजकों की तरफ से जारी बयान के अनुसार, पुराना किला परिसर में शनिवार शाम उद्घाटन समारोह में देश-विदेश के कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुतियों ने जादुई रंग बिखेरा।
बयान के अनुसार, 15 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में 26 देशों सहित देश-विदेश के करीब डेढ़ हजार बेहतरीन कलाकार, नृत्य, कठपुतली नाच, साहित्य, विजुअल आर्ट्स, संगीतज्ञ और रंगमंच के कलाकार लोगों का मनोरंजन करेंगे। इस महोत्सव को ‘भारत उत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है, जो सांस्कृतिक कूटनीति के साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
वंदे मारतम नृत्य की प्रस्तुति देश के प्रसिद्ध डांस रेपर्टरी की तरफ से की गई और दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट्स फेस्टिवल के संस्थापक प्रतिभा प्रहलाद ने इसे कोरिओग्राफ किया।
प्रहलाद ने कहा कि मातृभूमि भारत को श्रद्धांजलि देने के दौरान, वंदे मातरम शाश्वत माता के विभिन्न पहलुओं -काली, तारा, सोडसी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्तिका, भैरवी, मातंगी, बागलामयी और कमला- को चित्रित करते हैं।
प्रहलाद ने कहा, “इस फेस्टिवल में हम कला के पारंपरिक, लोक, शास्त्रीय एवं आधुनिक रूपों को एक ही मंच पर पेश करते हैं। हमारा मानना है कि सौंदर्यशास्त्र को देशों के द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसलिए हर किसी को कला गहरे तक छूता है और कला ही हमें अपनी असली पहचान देता है।”
उद्घाटन समारोह में विदेशी कलाकारों में ताईवान की तरफ से (हू ड्रिंक्स देयर?) ताई बाडी थियेटर द्वारा कंटंमपररी डांस, अर्जेटीना द्वारा साइरस थियेटर, अमेरिका और ताइवान द्वारा फ्यूजन डांस, रूस द्वारा कंटमपररी फ्यूजन डांस, और मिस्र द्वारा फोल्कोरिक एंड डेरविश डांस पेश किया गया।
बयान के अनुसार, इस महोत्सव के कार्यक्रम राजधानी के पुराना किला, कुतुबमीनार, सेंट्रल पार्क, सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, आईजीएनसीए ऑडिटोरियम, कमानी सभागार, इंडिया हैबिटेट सेंटर, बीकानेर हाउस जैसे 25 अलग-अलग इलाकों और स्थान में आयोजित किए जा रहे हैं।
बयान के अनुसार, कलाकार राजधानी के डेढ़ दर्जन स्कूलों का दौरा भी करेंगे और स्कूली बच्चों के बीच सांस्कृतिक ज्ञान और सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे। इस बार महोत्सव में ‘स्वच्छता ही सेवा’ को मूल अवधारणा के तौर पर शामिल किया गया है।
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