नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली के जिला अधिवक्ता संघों ने सर्वोच्च न्यायालय के चार न्यायाधीशों की ओर से प्रेस कान्फ्रेंस करने की निंदा की है।
दिल्ली के ऑल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की समन्वय समिति ने रविवार को कहा कि शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों को प्रधान न्यायाधीश से मतभेद को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। अधिवक्ताओं के संघों की ओर से प्रधान न्यायाधीश से भी नाराज न्यायाधीशों की शिकायतों को तत्काल सुनने का आग्रह किया गया।
समन्वय समिति ने कहा कि 12 जनवरी को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकुर और कुरियन जोसेफ द्वारा प्रेस कान्फ्रेंस करना और शीर्ष अदालत की कार्य-प्रणाली पर सवाल उठाना एक अभूतपूर्व घटना है।
समिति ने एक बयान में कहा, “हम शीर्ष अदालत के चारों वरिष्ठतम न्यायाधीशों के कार्य की निंदा करते हैं और प्रधान न्यायाधीश से उनकी शिकायतों को तत्काल सुनने का निवेदन करते हैं।”
अधिवक्ताओं के संघों की ओर से कहा गया कि नाराज न्यायाधीशों के पास और भी विकल्प थे। वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन या वरिष्ठ अधिवक्ताओं या राष्ट्रपति के पास अपनी बात रख सकते थे।
समिति ने कहा कि इन न्यायाधीशों के बयान से यह धारणा बनती है कि शीर्ष अदालत के कनिष्ठ न्यायाधीश बहुत सक्षम नहीं हैं।
समिति ने कहा, “हम समझते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की निष्ठा एक समान है और वे समान रूप से सक्षम भी हैं।”
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