..तो प्रधानमंत्री ने इसलिए चुना बीजापुर को

रायपुर, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के नक्सल हिंसा पीड़ित आदिवासी बहुल बीजापुर जिले में जनता की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए हो रहे कार्यो पर खुशी प्रकट करते हुए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है।

रायपुर, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के नक्सल हिंसा पीड़ित आदिवासी बहुल बीजापुर जिले में जनता की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए हो रहे कार्यो पर खुशी प्रकट करते हुए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है।

मोदी ने शनिवार को इस जिले के ग्राम जांगला में आयोजित कार्यक्रम में देश के एक सौ से अधिक आकांक्षी जिलों में से बीजापुर का चयन किए जाने के कारणों का भी खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे जिले जो विकास की दृष्टि से कुछ कमजोर हैं, उन्हें प्रोत्साहन देने पर वे तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा, “देश में सौ से ज्यादा ऐसे जिले हैं, जिन पर पिछड़े या कमजोर होने का लेबल लगा हुआ था। इन जिलों को भी विकास में साझीदार होने और वहां के बेटे-बेटियों को भी शिक्षा और कौशल विकास का अधिकार होना चाहिए। इन जिलों के लोगों को भी अस्पताल, स्कूल, पेयजल आदि हर प्रकार की बुनियादी सुविधाएं बेहतर ढंग से मिलनी चाहिए। इसी सोच के साथ हमने देशभर के ऐसे जिलों को आकांक्षी जिलों के रूप में चयनित किया है।”

उन्होंने कहा कि वे बीजापुर जिले से पिछड़ा का लेबल हटाने आए हैं। बीजापुर सहित ऐसे जिलों को नई सोच और नए एप्रोच के साथ आगे बढ़ना है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैंने इस वर्ष जनवरी में इन जिलों के अधिकारियों को बुलाया और उनसे कहा था कि इनमें से जो जिला तीन माह के भीतर तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा, वहां मैं 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के अवसर पर आऊंगा।”

मोदी ने कहा, “बीजापुर जिले के अधिकारियों को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने तीन माह में ये कर दिखाया। यहां से अन्य जिलों को भी प्रेरणा लेने की जरूरत है। मैं बीजापुर को आकांक्षी नहीं, बल्कि महत्वाकांक्षी जिला कहूंगा। अगर सभी जिलों के जनप्रतिनिधि, नागरिक और प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी संकल्प लें तो उनके जिले भी विकास का मॉडल बनकर उभर सकते हैं।”

मोदी ने कहा, “हर जिले की अलग-अलग जरूरतें होती हैं। उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की रणनीति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। स्थानीय संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। छोटे-छोटे कदम विकास की दौड़ आगे ले जाने में सहायक होते हैं। पूरी टीम यहां कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है।”

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