महाभियोग प्रस्ताव से अविचलित प्रधान न्यायाधीश ने पीठ की अध्यक्षता की

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय की अदालत संख्या एक की अध्यक्षता की। वह 64 सांसदों द्वारा उनको अपस्थ करने के लिए लाए गए प्रस्ताव से विचलित नहीं थे। हालांकि, शुरुआत में थोड़ी घबराहट जरूर थी।

प्रधान न्यायाधीश ने अपने सहज अंदाज में मामलों की सुनवाई की। सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की ओर से फिल्म पद्मावत से कुछ दृश्यों को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने 1934 में शरतचंद्र चटर्जी द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘देवदास’ का जिक्र किया।

उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि फिल्म को देखने के बाद कोई प्रेमी पियक्कड़ नहीं हो सकता है। फिल्म में मुख्य पात्र की भूमिका मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार ने निभाई है।

उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या कोई फिल्म देखने के बाद सती बन सकती है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इतने वर्षो में नारी अधिक सशक्त हुई है।

अदालती कार्यवाही सोमवार को आरंभ होने से पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में खबर आ चुकी थी कि राज्यसभा सभापति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश पर महाभियोग चलाने की मांग अस्वीकार कर दी है।

सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को सामान्य समय 10.30 बजे सुबह से 13-14 मिनट देर से अदालती कार्यवाही शुरू हुई।

इलेक्ट्रॉनिक सूचना पट दिखा रहा था कि किसी भी अदालत में कार्यवाही शुरू नहीं हुई थी।

अदालत संख्या तीन की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजन गोगई द्वारा किए जाने से दिन की कार्यवाही शुरू हुई। इसके थोड़ी देर बाद प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ के सहायक दाखिल हुए।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493