कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव कार्यक्रम में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। न्यायालय ने हालांकि चुनाव प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग की आलोचना की, जिसपर विपक्षी पार्टियों ने विभिन्न बिंदुओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
न्यायमूर्ति बिश्वनाथ समादर और न्यायमूर्ति अरिंदम मुखर्जी की खंडपीठ ने हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग(एसईसी) की अधिसूचना को खारिज करने से इंकार कर दिया। एसईसी ने अपनी नई अधिसूचना में 14 मई को पंचायत चुनाव कराने की घोषणा की है।
पीठ कांग्रेस की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया है कि एसईसी की अधिसूचना में नामांकन प्रक्रिया से लेकर परिणाम तक सभी तिथियों के बारे में बताना चाहिए, न कि केवल मतदान कार्यक्रम की जानकारी देनी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि एसईसी ने 20 अप्रैल को दिए आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें उसे सभी हितधारकों के साथ सुरक्षा-व्यवस्था के संबंध में ‘सार्थक चर्चाएं’ करने और अदालत में रपट दाखिल करने के लिए कहा गया था।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा बिना स्पष्टीकरण के तीन चरणों के चुनाव को एक साथ कराने का निर्णय चौंकाने वाला है।
अदालत ने एसईसी से कहा कि वह न्यायालय की टिप्पणी को ‘सचेतक के रूप में ले’ और भविष्य में निष्पक्ष रूप से चुनावी प्रक्रियाओं को अंजाम दे।
पीठ ने आदेश दिया कि उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक पार्टी द्वारा चुनाव में नहीं किया जा सकता।
एसईसी ने इससे पहले एक, तीन और पांच मई को तीन चरणों में पंचायत चुनाव की घोषणा की थी। लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चुनाव पूर्व हिंसा के चल रहे मामले और नामांकन पत्र दाखिल करने के मुद्दे पर आयोग को फिर से चुनाव की तिथि की घोषित करने के निर्देश दिए थे।
कांग्रेस के याचिकाकर्ता रित्जु घोषाल ने कहा कि अदालत की टिप्पणी इस ओर इशारा करती है कि आयोग की इस प्रक्रिया में जरूर कुछ खामी है और भविष्य में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह एक अच्छा कदम है।
वहीं इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के नेता प्रताप बनर्जी ने कहा, “हम पंचायत चुनाव को रोकने या टालने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन चीजें काफी जटिल हो गईं, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने एक स्वतंत्र निकाय की तरह काम करने के बजाए तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार के लिए काम किया।”
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