लखनऊ, 23 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित झूलेलाल वाटिका में आयोजित सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा में उप्र की कई राजनीतिक हस्तियों ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर सभी लोगों ने अटलजी के संस्मरणों को याद करते हुए अपने विचार प्रकट किए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, लखनऊ से सांसद व गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल राम नाईक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन, सपा के संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय मौजूद थे। इसके अलावा विभिन्न धर्मो के धर्मगुरु, उप्र सरकार के सभी मंत्री व विधायक मौजूद थे।
अटलजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुलायम सिंह यादव ने कहा, “अटल जी देश के नहीं पूरे विश्व के नेता थे। आपने देखा होगा अमेरिका ने भी शोक प्रस्ताव दिया। वह पार्टी या देश के नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेता थे। पूरी दुनिया में उनका सम्मान था। वह सब का आदर करना जानते थे।”
मुलायम ने कहा कि “वह हमें भोजन पर भी बुलाते थे हमें बहुत दुख है। वह केवल एक दल के नेता नहीं थे, उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम सभी जगहों पर उनके लिए सम्मान था। मैंने अटल जी से बहुत कुछ सीखा है देश को सवरेपरि मानकर के उनके आदर्शो पर चलने के लिए मैंने पूरा प्रयास भी किया।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल की श्रद्धांजलि सभा में उन्हें अपना आदर्श बताते हुए कहा कि हम आदरणीय अटल जी के पदचिन्हों पर चलकर ही प्रदेश का विकास करेंगे। अटलजी जैसा शिखर पुरुष मिलना कठिन है। सभी दलों के भीतर उनकी बराबर स्वीकार्यता थी, इसी वजह से वह सभी के प्रिय थे।
योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का छह दशक का लंबा कार्यकाल राजनीतिक इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने हमेशा ही मूल्यों एवं सिद्धांतों की राजनीति की। राष्ट्रहित उनके लिए सवरेपरि था। उन्होंने देशहित में कई कड़े फैसले भी लिए।
राजनाथ सिंह ने कहा, “अटलजी मुझे अत्यंत स्नेह करते थे। उनके जैसा नेता मिलना कठिन है। अटलजी देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक थे। इसीलिए विपक्ष भी उनका पूरा सम्मान करता था।”
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा, “काल के कपाल ने इस देश की एक विशुद्ध वाणी को हमसे छीन लिया है। वह एक ऐसी कसौटी खड़ी कर गए हैं जिसके लिए उनके दल के लोगों के सामने भी एक चुनौती बन गई है। अटलजी को देखकर और उनकी भाषाशैली को सुनकर ही मैंने राजनीतिक चर्चा में हिस्सा लेना शुरू किया था।”
उन्होंने कहा, “जब मुझे उनके खिलाफ चुनाव लड़ना पड़ा तो मैंने एक मुलाकात में उनसे कहा कि अटलजी, मुझे आशीर्वाद दीजिए कि मैं चुनाव में कुछ ऐसा न कहूं जो कि गलत हो। अटल जी ने जवाब दिया कि जाओ, तुमसे कभी ऐसा नहीं होगा। मेरे लिए ये एक बड़ी बात थी कि मैं एक बड़े नेता के खिलाफ चुनाव मैदान में हूं और उन्होंने इस तरह से मुझे प्यार दिया।”
राज बब्बर ने कहा कि अटलजी बड़े दिलवाले नेता थे। बड़े दिलवालों की स्वीकार्यता भी बड़ी होती है। खास बात है कि उनकी सियासत ने उनके अंदर के मनुष्य को कभी दबने नहीं दिया।
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