नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) ने आतंकी वित्तपोषण मामले में अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर फारूक से दूसरे दिन मंगलवार को भी पूछताछ की।
एक अधिकारी ने कहा कि जांचकर्ता सोमवार को पूछताछ के दौरान मीरवाइज के जवाब से असंतुष्ट थे, जिसके बाद उन्हें फिर से मंगलवार को बुलाया गया और उनके संगठन अवामी एक्शन कमेटी तथा हुर्रियत कांफ्रेस के वित्त पोषण से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया।
फारूक से हवाला संचालकों से संबंधों और विदेशी संपर्को के बारे में पूछताछ की गई। अधिकारियों ने मीरवाइज के घर से 26 फरवरी को जब्त किए गए दस्तावेजों पर भी उनसे जवाब मांगा।
सूत्रों के अनुसार, एनआईए की टीम ने उनके बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों और देश-विदेश में रह रहे उनके रिश्तेदार और उनके व्यापार के बारे में भी विवरण मांगे।
फारूक के साथ अन्य अलगाववादी नेता अब्दुल गनी भट्ट, बिलाल लोन और मौलाना अब्बास अंसारी भी मौजूद थे।
सोमवार को एनआईए मुख्यालय में फारूक से करीब आठ घंटे पूछताछ हुई थी। इसके पहले उनसे अपनी जान का खतरा बताकर समिति द्वारा भेजे गए दो सम्मन पर दिल्ली आने में असमर्थता जाहिर की थी।
एनआईए ने मंगलवार को अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी के बेटे नसीम गिलानी को भी सम्मन भेजा।
एनआईए ने 2017 में कश्मीर घाटी में हुई हिंसा के बाद आतंकी वित्तपोषण का मामला दर्ज किया था।
एजेंसी ने शाहिद-उल-इस्लाम उर्फ आफताब हिलाली शाह, अयाज अकबर खांडेय, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान, अल्ताफ अहमद शाह, राजा मेहराजुद्दीन कलवल और बशीर अहमद भट्ट उर्फ पीर सैफुल्लाह को भी गिरफ्तार किया है।
अल्ताफ अहमद शाह, सैयद अली गिलानी का दामाद है, जो जम्मू एवं कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की वकालत करता है।
शाहिद-उल-इस्लाम फारूक का सहयोगी और खांडेय गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत का प्रवक्ता है। इसके अलावा कश्मीरी व्यापारी जहूर अहमद शाह वटाली को अगस्त 2017 में इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।
आतंक-रोधी एजेंसी ने इस मामले में 18 जनवरी, 2018 को 12 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा सहित हिजबुल मुजाहिदीन का मुखिया सैयद सलाहुद्दीन का नाम भी शामिल है।
dharmpath.com dharmpath