कभी कम्युनिस्ट थे गिरीश गौतम – राजनैतिक पाला बदल भाजपाई हो गए ,अब बने विधानसभा अध्यक्ष

भोपाल- सोमवार से मप्र का विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होता है। इस बार विंध्य क्षेत्र के नेता और भाजपा से चार बार के विधायक गिरीश गौतम को इस पद के लिए चुना गया है। गिरीश गौतम 17 साल बाद विधानसभा अध्यक्ष बनने वाले विंध्य क्षेत्र के नेता होंगे। इससे पहले विंध्य के कद्दावर नेता श्रीनिवास तिवारी 9 साल 352 दिन विधानसभा के अध्यक्ष रहे। तिवारी का दो बार का कार्यकाल दिग्विजय सरकार के दौरान 24 दिसंबर 1993 से 11 दिसंबर 2003 तक रहा। विधानसभा के 18वें अध्यक्ष चुने जाने वाले गिरीश कभी क्मयूनिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ा करते थे।
गिरीश गौतम ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए हाल ही में नामांकन भरा है। नामांकन के दौरान गौतम के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे। गिरीश को निर्विरोध अध्यक्ष चुना जा रहा है। कांग्रेस इस पद के लिए अपना उम्मीदवार नहीं उतार रही है। गिरीश सोमवार को विधानसभा के 18वें अध्यक्ष चुने जाएंगे। गिरीश 1972 से छात्र राजनीति में सक्रिय रहे।

लगातार कुछ सालों तक किसानों और मजदूरों के लिए लड़ने वाले गिरीश 1985 में कम्यूनिस्ट पार्टी की तरफ से गूढ़ विधानसभा से चुनाव लड़े। इस चुनाव में गिरीश को असफलता हाथ लगी। इसके बाद 1998 में एक बार फिर वह कांग्रेस के कद्दावर नेता श्रीनिवास तावारी के सामने हार गए। इस चुनाव में मिली हार के बाद गिरीश ने भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा का दामन थामते ही गिरीश की किस्मत चमकी और 2003 में मनगवां विधानसभा सीट से चुनाव जीता। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के श्रीनिवास तिवारी को 28 हजार मतों से हराया।

2003 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले गिरीश ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। गिरीश ने इसके बाद 2008 में फिर से विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन इस चुनाव में मनगवां विधानसभा सीट आरक्षित होने की वजह से वे यहां से चुनाव नहीं लड़ पाए। इसके बाद गिरीश ने देवताल सीट को अपना गृह क्षेत्र बनाया। इसके बाद से लगातार गिरीश वहां से विधायक रहे हैं। 2008 में उन्होंने यहां से चुनाव जीता।

इस दौरान वह प्राक्कलन, विशेषाधिकार, सार्वजनिक उपक्रम समितियों के सभापति रहे। इसके बाद 2013 में एक बार फिर गिरीश इसी सीट से विधायक चुने गए। इस कार्यकाल में वे जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि जबलपुर की प्रबंध सभा के सदस्य, उत्तर-मध्य रेलवे परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से विधायक चुने गए। गिरीश चार बार विधायक के पद पर चुने गए हैं। हालांकि इससे पहले गिरीश के पास कोई बड़ा पद नहीं रहा है। शिवराज सरकार की कैबिनेट में इस बार वह मंत्री पद के दावेदारी पेश कर रहे थे। अब गिरीश सोमवार को 18वें विधानसभा अध्यक्ष पद की शपथ लेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष के पद पर चुने जाने के बाद गिरीश ने कहा कि भाजपा पार्टी ने विंध्य क्षेत्र का हमेशा से सम्मान किया है। अपने चयन को लेकर गिरीश ने कहा कि विधायकों के हितों की रक्षा करना मेरी प्राथमिकता होगी। विंध्य को हमेशा से मिलता सम्मान रहा है, उपेक्षा जैसी कोई बात नहीं है। अध्यक्ष पद के लिए दूसरे दावेदारों के नामों लेकर गिरीश ने कहा कि सबको अपनी बात रखने का हक है। वहीं विंध्य क्षेत्र को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर गिरीश ने कहा कि मांग उठाने वाले दूसरे लोग हैं। बीजेपी के अंदर कोई मांग नहीं उठा रहा है। मुझे खुशी है कि इस पद के लिए चुना गया हूं। विधायकों के हितों की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी होगी।

About Dharm Path


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493