लखनऊ-यूपी में किसानों के लिए खाद की कमी, कालाबाजारी देखते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नया नियम लागू किया गया है. अब साधन सहकारी समितियों से यूरिया, डीएपी या अन्य उर्वरक केवल उन किसानों को मिलेंगे जो समिति के सदस्य हों या जिनके पास फार्मर आईडी (किसान क्रेडिट कार्ड या कृषक कार्ड) हो. बाहरी (गैर-सदस्य) किसानों को इन समितियों से खाद नहीं दी जाएगी. इसका उद्देश्य एक किसान द्वारा कई समितियों से खाद लेने की समस्या रोकना है जिससे कालाबाजारी कम होगी.
सदस्य किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा. जिसमें आधार, खतौनी (भूमि दस्तावेज) या अन्य दस्तावेजों की जगह सीधे फार्मर आईडी से खरीदारी आसान बनेगी. यह नीति 2024 के खरीफ सीजन से लागू हो रही है, लेकिन सदस्यता अभियान 2025 के आखिर तक जारी है. उदाहरण के लिए, बलरामपुर जिले में सदस्यता अभियान की डेडलाइन 15 अक्टूबर 2025 तक बढ़ाई गई है.
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