नयी दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में ऐतिहासिक निर्देश जारी करते हुए कहा कि वो डेली वर्क के लिए ज्यादा से ज्यादा हिंदी भाषा का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही अब जो भी मरीज अस्पताल में आएगा डॉक्टर उसे पर्चे पर दवाओं का नाम हिंदी में लिखकर देंगे न कि अंग्रेजी भाषा में.
माना जा रहा है कि ये कदम देश में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और आम मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. निर्देश में ये साफ कहा गया है कि ये बदलाव केवल अस्पतालों कुछ विभागों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि रोजाना के काम-काज के लिए भी इसके इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा.
स्वास्थ्य मंत्रालय के इस निर्देश से मरीजों की सालों पुरानी शिकायत दूर होगी. बता दें कि AIIMS दिल्ली के OPD में रोजाना करीब 15,000 से 18,000 मरीज आ रहे हैं. इनमें ज्यादातर ग्रामीण लोग होते हैं. ये लोग इंग्लिश में दवा का नाम पढ़कर कई बार गलत दवा ले लेते हैं. इन सब में वरिष्ठ नागरिकों और अशिक्षित मरीजों को सबसे ज्यादा परेशान होती थी. पर अब इस निर्देश के बाद उन्हें कुछ राहत मिलेगी.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने निर्देश में बताया कि अब मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए किताबें अब हिंदी में भी उपलब्ध होंगी. इस फैसले से हिंदी रिसर्च वर्क में भी प्रोत्साहन मिलेगा. हालांकि हिंदी का इस्तेमाल फिलहाल वैकल्पिक रहेगी. इसके लिए उन छात्रों पर दबाव नहीं बनाया जाएगा जिन छात्रों को हिंदी नहीं आती है. इस बदलाव का मकसद केवल इतना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए आसा बनाया जा सके.
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