नई दिल्ली-भारत में एक बार फिर मजदूर आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है. आगामी 12 फरवरी को देशभर के करीब 30 करोड़ मजदूर एक साथ हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. यह आह्वान 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त संगठन द्वारा किया गया है.यूनियनों का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है जिन्हें वे मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक मानते हैं. ट्रेड यूनियनों के समूह ने इस आंदोलन की नींव जनवरी 2025 में ही रख दी थी. उनका आरोप है कि सरकार की मौजूदा नीतियां आम जनता और श्रमिकों के हितों को नजरअंदाज कर बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचा रही हैं.
मजदूरों की मुख्य मांगों में बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को वापस लेना शामिल है. इस हड़ताल का एक बड़ा केंद्र ‘मनरेगा’ भी है. कृषि मजदूर यूनियनों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति सुधारने और मनरेगा को पूरी ताकत से दोबारा प्रभावी बनाने की सख्त जरूरत है.
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस बार का आंदोलन ऐतिहासिक होने वाला है. उन्होंने बताया कि पिछली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में लगभग 25 करोड़ मजदूरों ने हिस्सा लिया था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 करोड़ के पार जाने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि पिछले साल यह आंदोलन 550 जिलों तक सीमित था, जबकि इस बार देश के 600 जिलों में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा. यह दावा केवल हवा-हवाई नहीं है. जिला और ब्लॉक स्तर पर महीनों से तैयारियां चल रही हैं.हड़ताल का असर केवल औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा. अमरजीत कौर का मानना है कि बीजेपी शासित राज्यों में भी इसका कड़ा प्रभाव दिखेगा. विशेष रूप से ओडिशा और असम में पूरी तरह से बंद जैसी स्थिति रहने की संभावना जताई गई है. यह हड़ताल लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित करेगी.
dharmpath.com dharmpath