इंदौर-मध्य प्रदेश के इंदौर में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। खजराना क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल को मंजूरी मिले छह साल बीत चुके हैं लेकिन आज तक न अस्पताल के लिए जमीन पर कब्जा मिल पाया है और न ही भवन निर्माण शुरू हो सका है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल का अस्तित्व केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित है। जबकि, उसके नाम पर 87 पद स्वीकृत किए जा चुके हैं, कर्मचारियों की नियुक्तियां हो चुकी हैं और लगातार ट्रांसफर-पोस्टिंग भी जारी है। हाल ही में 15 जून 2026 को एक लैब टेक्नीशियन का तबादला भी इसी अस्पताल के नाम पर किया गया। जबकि, अस्पताल ने आज तक एक भी मरीज भर्ती नहीं किया है।
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