प्रकाश झा दिखाते हैं समाज का सच (जन्मदिन : 27 फरवरी)

नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। प्रकाश झा का नाम सुनते ही दिलोदिमाग में एक ऐसे फिल्म निर्देशक की छवि बरबस उभरती है, जो अपनी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाते हैं। वह समाज का सच सामने लाते हैं, इसलिए उनकी फिल्में मनोरंजन करने के साथ-साथ सोचने को मजबूर करती हैं।

नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। प्रकाश झा का नाम सुनते ही दिलोदिमाग में एक ऐसे फिल्म निर्देशक की छवि बरबस उभरती है, जो अपनी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाते हैं। वह समाज का सच सामने लाते हैं, इसलिए उनकी फिल्में मनोरंजन करने के साथ-साथ सोचने को मजबूर करती हैं।

‘दामुल’ (1985), ‘मृत्युदंड’ (1997), ‘गंगाजल’ (2003), ‘अपहरण’ (2005), ‘राजनीति’ (2010), ‘आरक्षण’ (2011) व ‘चक्रव्यूह'(2012) उनकी कुछ ऐसी ही फिल्में हैं जो चर्चा में रही हैं।

प्रकाश झा ने अपनी पहली फिल्म ‘दामुल’ के जरिये गांव की पंचायत, जमींदारी, स्वर्ण तथा दलित संघर्ष की नब्ज को छुआ। इसके बाद सामाजिक सरोकार की फिल्में बनाईं। बाद में ‘मृत्युदंड’, ‘गंगाजल’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ व ‘चक्रव्यूह’ लेकर मैदान में उतरे। अपने बलबूते पर उन्होंने आम चुनाव में उम्मीदवार बनकर हिस्सा लिया है। ये बात अलग है कि उनके हिस्से में हर बार हार ही आई।

प्रकाश झा की गिनती ऐसे फिल्मकारों में होती है जो अपनी फिल्मों के जरिये ज्वलंत मुद्दा उठाते हैं, फिर चाहे वो उनकी ‘गंगाजल’ हो, ‘अपहरण’ हो, ‘राजनीति’ हो या ‘चक्रव्यूह’ फिल्म हो। अजय देवगन व ग्रेसी सिंह अभिनीत ‘गंगाजल’ राजनीति के अपराधीकरण और अपराध के राजनीतिकरण की सही व्याख्या करती है। रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ, मनोज बाजपेयी व नाना पाटेकर की मुख्य भूमिका वाली ‘राजनीति’ में उन्होंने दिखाया कि कैसे सत्ता की भूख अपनों को अपनों का ही दुश्मन बना देती है।

‘अपहरण’ में उन्होंने बिहार में चल रहे अपहरण उद्योग का सही पर मनोरंजक खाका खींचा। अभय देयोल, अर्जुन रामपाल व मनोज वाजपेयी अभिनीत ‘चक्रव्यूह’ में नक्सली समस्या और उसके न खत्म होने की वजहों पर चर्चा की। वहीं, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण, सैफ अली खान व मनोज वाजपेयी अभिनीत ‘आरक्षण’ के जरिए उन्होंने आरक्षण के दोनों पहलुओं को रखने का प्रयास किया।

27 फरवरी, 1952 को बिहार के चंपारण जिले में जन्मे प्रकाश झा ने अपनी पढ़ाई बोकारो शहर के केंद्रीय विद्यालय नं. एक और कोडरमा जिले के तिलैया में स्थित सैनिक स्कूल से की। बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित रामजस कॉलेज से बी.एस.सी. में ऑनर्स किया। 1973 में उन्होंने फिल्म एडिटिंग सीखने के लिए पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया।

प्रकाश झा अभिनेत्री दीप्ति नवल के पति हैं। उनकी बेटी दिशा है, जिसे उन्होंने गोद लिया है। वह साफगोई से अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। उनका यह बिंदासपन या साफगोई हल में उनकी फिल्म ‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’ के प्रमोशन इवेंट पर दिखी। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘धर्म परिवर्तन करना सबका मौलिक अधिकार है। व्यक्ति जिस धर्म को चाहे उसे मान सकता है। उसे अपना सकता है। अगर आदमी यह सोचने लगे कि उसको धर्म की रक्षा करनी है, तो यह विकृति ही है। आदमी धर्म की रक्षा नहीं कर सकता, धर्म आदमी की रक्षा करता है।’

‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’ 16 जनवरी को रिलीज हुई। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर निराशा हाथ लगी।

प्रकाश झा ने ‘दिल दोस्ती ईटीसी’ जैसी प्रयोगधर्मी फिल्म भी बनाई। ‘टर्निग 30’ में उन्होंने एक चर्चित विषय को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया।

असल जिंदगी से लेते हैं प्रेरणा :

‘अपहरण’ और ‘गंगाजल’ जैसी अपराध केंद्रित फिल्में बनाने वाले प्रकाश झा की फिल्में असल जिंदगी की घटनाओं से प्रेरित नजर आती हैं। इसी कड़ी में हाल में उन्होंने सुपरस्टार सलमान खान से जुड़े काला हिरण शिकार मामले पर एक फिल्म बनानी शुरू की है। फिल्म का नाम ‘कैदी नंबर 210’ है।

इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें काम करने वाले लोग असल जिंदगी में सलमान खान के साथ काला हिरण शिकार मामले में जोधपुर जेल में समय काट चुके हैं। इन लोगों में सलमान की बैरक में रहे कैदी महेश सैनी अपनी ही भूमिका निभा रहे हैं।

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