विशाखापत्तनम, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का सम्मेलन मंगलवार को शुरू हुआ। सम्मेलन में पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने पार्टी को अधिक सशक्त बनाने तथा हाल के वर्षो में पार्टी को हुए नुकसान से उबरने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने वामदलों की एकता का भी आह्वान किया।
माकपा की 21वीं कांग्रेस को संबोधित करते हुए करात ने कहा कि दक्षिणपंथी आक्रामकता से मुकाबले के लिए वामपंथी एकता को मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “वर्तमान समय में माकपा और वामपंथी दलों की स्वतंत्र शक्ति का विस्तार अत्यावश्यक है। हमें हाल के समय में खासतौर से पश्चिम बंगाल में माकपा और वामपंथी दलों को मिली पराजय से उबरना होगा।”
उन्होंने सभी वाम दलों और समूहों को एक बड़े मंच पर एक साथ लाने और वाम नेतृत्व वाले जन संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने की जरूरत को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “वामपंथी दलों की मजबूत एकता से हम अन्य सभी लोकतांत्रिक ताकतों को एकत्र कर सकते हैं और वामपंथ एवं लोकतांत्रिक दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”
करात ने कहा कि इस सम्मेलन से लोगों को एक स्पष्ट और सुनिश्चित संदेश जाएगा कि भ्रष्ट एवं सांप्रदायिक व्यवस्था का एकमात्र विकल्प वाम और लोकतांत्रिक विकल्प है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है, जो कुछ नहीं बस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का राजनीतिक विस्तार है। इसलिए मोदी सरकार, आरएसएस का संयुक्त उपक्रम है।”
करात ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने हिंदुत्ववादी ताकतों को उनका सांप्रदायिक एजेंडा आगे बढ़ाने का रास्ता दिया है।
उन्होंने कहा, “भाजपा और आरएसएस भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक नींव को ध्वस्त करना चाहते हैं।”
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