पणजी, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण गोवा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी. सवईकर ने एक निचली अदालत द्वारा राज्य के पूर्व मंत्री मिक्की पचेको की गुमशुदगी के मामले में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के आधिकारिक आवास की तलाशी के लिए जारी वारंट पर रोक लगा दी है।
पचेको इस महीने की शुरुआत से ही लापता हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2006 में राज्य बिजली विभाग के एक कनिष्ठ अभियंता के उत्पीड़न के मामले में उन्हें छह महीने जेल और 1,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत परसेकर ने बताया कि पर्रिकर के आधिकारिक आवास की तलाशी के लिए निचली अदालत द्वारा जारी वारंट पर बुधवार रात रोक लगा दी गई है।
परसेकर ने फोन पर आईएएनएस को बताया, “वारंट पर रोक लगा दी गई है। पुलिस ने निचली अदालत के तलाशी वारंट जारी करने के निर्देश के खिलाफ अपील की थी।”
पचेको बीते दो सप्ताह से लापता हैं।
तलाशी वारंट पर रोक को लेकर मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय में संभावित है।
इससे पहले, प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी (मडगांव) बोस्को रॉबर्ट्स, पूर्व अभिलेखागार एवं पुरातत्व राज्यमंत्री पचेको की गिरफ्तारी की प्रक्रिया की निगरानी कर रहे थे, जिन्हें उत्पीड़न के मामले में के दोषी ठहराए जाने के फैसले को इस महीने की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया था ।
अधिवक्ता एवं कार्यकर्ता एरिस रोड्रिग्ज की ओर से निचले न्यायालय में याचिका दायर कर यह जानकारी देने के बाद कि पचेको को नई दिल्ली के 10, अकबर रोड के आसपास देखा गया है, जहां पर्रिकर का आवास है। न्यायालय ने तलाशी वारंट में पुलिस को पर्रिकर के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास की तलाशी लेने के निर्देश दिए थे।
कोल्वा पुलिस थाने के प्रभारी उत्तम राउतदेसाई ने न्यायालय को सौंपे गए जवाब मे कहा कि जांच में पता चला है कि पचेको आठ अप्रैल को गोवा से दिल्ली रवाना हुए थे। राउतदेसाई को ही पचेको की गिरफ्तारी का काम सौंपा गया था।
राउतदेसाई ने हालांकि यह स्वीकार किया कि उनकी टीम पचेको को दिल्ली में गिरफ्तार करने में नाकामयाब रही।
उन्होंने कहा कि पुलिस पचेको के बैंक खातों की छानबीन कर रही है और उनके हालिया खर्चो के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही है।
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