भुवनेश्वर, 11 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने प्रतिबंधित डायक्लोफेनैक दवा का भारत में जानवरों पर हो रहे दुरुपयोग पर निगरानी रखने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को एक समिति का गठन करने को कहा है।
ओडिशा के मानवाधिकार कार्यकर्ता अखंड की एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मानवाधिकार आयोग ने मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह सभी राज्य सरकारों को इस संबंध में केंद्र के निर्देश को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दे।
मई 2014 के इस मुद्दे को उठाते हुए एनएचआरसी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को डायक्लोफेनैक के दुरुपयोग के मुद्दे पर मंत्रालय की प्रतिक्रिया सौंपने का निर्देश दिया है। इस दर्दरोधी दवा से देश में गिद्ध बेमौत मारे जा रहे हैं।
कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि चूंकि जानवरों में डायक्लोफेनैक का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, लेकिन यह दवा केमिस्ट व निजी दवा दुकानों में आसानी से उपलब्ध है, क्योंकि इससे मनुष्यों का भी इलाज होता है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि मनुष्यों में इस दवा की सामान्य डोज केवल तीन मिलीलीटर है, जबकि जानवरों में तीन या चार दिनों तक लगभग 11 मिलीलीटर।
व्यापक पैमाने पर गिद्धों की मौत से पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो गया है, जो मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने साल 2008 में ही जानवरों के लिए डायक्लोफेनैक दवा के निर्माण, इस्तेमाल व आयात को प्रतिबंधित कर दिया था।
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