नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा लागू किया गया भूमि कानून गांव विरोधी था, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा पेश विधेयक के जरिए पिछले कानून में जरूरी बदलाव किए गए हैं।
केंद्र की राजग सरकार के एक साल पूरे होने के अवसर पर जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा, “2013 में बना कानून गांव में अवसंरचना, सिंचाई प्रणाली, सड़कों, औद्योगीकरण और आवासीय परियोजनाओं को रोकता है। 2013 का कानून गांव विरोधी है। 2015 के विधेयक के जरिए इसमें जरूरी बदलाव किए गए हैं।”
उन्होंने कहा, “बाधाओं के बीच फैसला लेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विशेषता रही है।”
सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेशों के बारे में उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार की तेज गति को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, वे इसकी आलोचना कर रहे हैं।
जेटली ने कहा, “तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। दिशा को लेकर पूरी स्पष्टता है। यह दिशा विकास की ओर है।”
उन्होंने कहा कि भूमि विधेयक सरकार मानसून सत्र में पारित कराना चाहती है। अभी यह संसद की स्थायी समिति के विचाराधीन है।
उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को यह कहने का अधिकार नहीं है कि वह विधेयक को पारित नहीं होने देगी।
जेटली ने कहा कि सदन में मौजूदा संख्या यह तय करेगा कि विधेयक पारित होगा या नहीं।
मोदी के विदेश दौरे पर कांग्रेस की आलोचना के जवाब में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की राष्ट्रीय राजनीति से 55 दिनों की अनुपस्थिति पर व्यंग्य करते हुए कहा कि छुट्टी पर जाना और दूसरे देशों की राजकीय यात्रा पर जाना अलग-अलग है।
उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि राजग सरकार कंपनियों के हित के लिए काम करती है। उन्होंने कहा कि पिछली संप्रग सरकार की आर्थिक नीति स्पष्ट नहीं थी और पूंजीवादी मित्रवाद के कारण उसका पतन हो गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सुधार और उदारीकरण कर रही है और इसमें पूंजीवादी मित्रवाद के लिए कोई जगह नहीं है।
जेटली ने कहा कि सरकार के हर विभाग पिछले एक साल से दिन-रात काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से प्रभावी तरीके से निपट रही है और सहयोगात्मक संघवाद के लिए प्रतिबद्ध है।
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