कोलकाता, 4 जून (आईएएनएस)। प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए विद्यार्थियों द्वारा 10वीं और 12वीं में काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (सीआईएससीई) के बजाय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को तरजीह देने की अवधारणा गलत है। एक अधिकारी ने गुरुवार को यह बात कही।
सीआईएससीई 12वीं के विद्यार्थियों के लिए आईएससी और और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए आईसीएसई की परीक्षा आयोजित करता है।
सीआईएससीई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव गेरी एराथून ने यहां संवाददाताओं से कहा, “यह अवधारणा गलत है और लोगों की सोच है कि सीबीएसई विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करता है।”
एराथून ने कहा, “सीबीएसई चूंकि अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (एआईईईई) और ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) जैसी परीक्षाएं आयोजित करवाता है, तो लोगों के बीच यह धारणा बन गई है कि आईसीएसई/आईएससी के बजाय सीबीएसई विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी करवाता है।”
एराथून ने कहा कि दोनों राष्ट्रीय बोर्ड के पाठ्यक्रम समान हैं और प्रश्न पत्र भी लगभग एक समान ही हैं।
उन्होंने कहा कि यह दूसरे राज्यों के कॉलेज और विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय बोर्ड के विद्यार्थियों के साथ किए जाने वाले भेदभाव के विरोध में है।
उन्होंने कहा, “बंगाली छात्र/छात्राओं के साथ सिर्फ इसलिए पक्षपात क्यों किया जाना चाहिए कि वे आईसीएसई बोर्ड के छात्र रहे हैं? हम देखेंगे कि बंगाल में क्या स्थिति है और उसी अनुसार राज्य सरकार को सूचित करेंगे।”
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