नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईवाईडी) पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित राजपथ पर रविवार सुबह हजारों लोगों ने योग अभ्यास किया। योग अभ्यास करने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल थे।
राजपथ पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम से जुड़ी कुछ विशेष झलकियां..
प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उन हजारों लोगों में शामिल थे, जिन्होंने राजपथ पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
पीएमओ में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था।
क्या उन्होंने आईवाईडी प्रोटोकॉल के पहले आसन का अभ्यास किया था?
पीएमओ के एक अधिकारी ने कहा, “नहीं, मैंने सिर्फ पर्चियां देखी थीं। मैं हालांकि, कभी-कभी योग अभ्यास करता हूं। इसलिए मैं आश्वस्त था कि मैं आसानी से यह कर लूंगा।”
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दिल्ली पुलिस से प्रशिक्षण प्राप्त 1400 महिलाओं ने भी योग दिवस के कार्यक्रम में राजपथ पर हिस्सा लिया।
अस्थायी उप-निरीक्षक कोमल ने बताया कि कार्यक्रम से 10 दिन पहले उन्हें रोज सुबह-शाम एक-एक घंटे प्रशिक्षण दिया जाता था।
ये महिलाएं नजफगढ़ के जरोडा कलां स्थित दिल्ली पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज से थीं।
एक महिला ने बताया कि 1400 महिलाओं में 132 अस्थायी उप निरीक्षक और 1200 कांस्टेबल थीं।
उन्होंने बताया, “हमने दिल्ली पुलिस से जुड़ने के लिए पिछले साल नवंबर में प्रशिक्षण शुरू किया था।”
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इंटरनेशनल सोशायटी फॉर कृष्णा कांसियसनेस (इस्कॉन) के महाप्रबंधक और प्रवक्ता राधारमण दास इस्कॉन भक्ति योग के सबसे बड़े समर्थक हैं।
दास को राजपथ पर आयोजित कार्यक्रम के लिए न्योता दिया गया था और उन्होंने आईएएनएस को बताया कि योग कार्यक्रम भारत में इस्कॉन के 600 केंद्रों में आयोजित किया जा रहा है।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिन लोगों ने हिस्सा लिया उन सभी को नम्बर वाली पुस्तिका की विशेष पर्ची दी गई थी, जो कि इस कार्यक्रम को गिनीज बुक ऑफ वल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने की एक कोशिश का हिस्सा थी। ये पर्चियां राजपथ के 30 प्रवेश द्वारों पर बांटी जा रही थीं।
सभी पर्चियों को गिना जाएगा और गिनीज के अधिकारियों के आंकड़े से मिलाया जाएगा।
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दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने विशेष बसें चलाईं, जो प्रतिभागियों को पूरे शहर से लेकर उनके गंतव्य तक ले गईं।
प्रतिभागियों ने सुबह 4.30 बजे ही बस लेनी शुरू की।
स्टीकर लगी बसों और वाहनों को ही तुगलक मार्ग से जाने की इजाजत दी गई।
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