नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष अदालत ने सोमवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.के. थुंगन को 1998 के भ्रष्टाचार के एक मामले में साढ़े चार साल कैद की सजा सुनाई।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय कुमार जैन ने थुंगन पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने दो अन्य दोषियों सी.संगीत तथा ताली ए.ओ. को साढ़े तीन साल, जबकि एक अन्य दोषी महेश माहेश्वरी को ढाई साल जेल की सजा सुनाई।
सीबीआई ने थुंगन को अधिक से अधिक सजा देने की मांग करते हुए कहा कि उनके खिलाफ चार और मामले लंबित हैं।
थुंगन के वकील ने हालांकि अदालत से यह कहते हुए उदारता बरतने की मांग की कि उनके मुवक्किल की उम्र 68 वर्ष हो चुकी है और उन्हें निम्न रक्त चाप है तथा दृष्टि भी कमजोर है।
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि थुंगन की पत्नी कई रोगों से पीड़ित हैं और उन्हें मस्तिष्काघात भी हो चुका है, इसलिए उन्हें नियमित तौर पर देखभाल की जरूरत होती है।
थुंगन व अन्य को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज बनाने तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया।
पी.वी.नरसिम्हा राव की सरकार में शहरी विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री रहे थुंगन अन्य आरोपियों के साथ नगालैंड में एक सिंचाई परियोजना में पैसों के गबन में शामिल थे।
सीबीआई के मुताबिक, नागालैंड सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर थुंगन ने साल 1993-94 के दौरान सॉसेज तार के लिए फर्जी आदेश दिया था।
जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि विभाग को किसी तार की आपूर्ति नहीं की गई थी, लेकिन फर्जी आदेश पर भुगतान करा लिया गया था।
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