विद्या (36) ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “मेरे ख्याल से हमें प्रत्येक महिला को सशक्त होने का अहसास कराने के लिए अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। लेकिन मुझे लगता है कि एक-एक दिन बीतने के साथ ही कुछ महिलाओं को अपने सामथ्र्य का पता चल रहा है, इसलिए महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है।”
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अदाकारा ने कहा, “सबसे पहले यह एक निजी मसला है, उसके बाद एक क्षेत्रीय, एक राष्ट्रीय और उसके बाद एक वैश्विक मुद्दा है। लेकिन मेरे ख्याल से सबसे जरूरी यह है कि इसे एक निजी मसले के रूप में लेना शुरू करना होगा, क्योंकि हम सभी को अपनी शक्ति और सामथ्र्य स्वयं तलाशनी होगी।”
विद्या राष्ट्रीय स्वच्छता की ब्रांड एंबेसडर हैं। वह पिछले माह डिटॉल के एक अभियान के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के दौरे पर गई थीं। इस अभियान का उद्देश्य 100 गांवों को खुले में शौच करने जैसी बुराई से मुक्त करना है।
विद्या का मानना है कि हर कोई अपनी मनचाही जिंदगी जीने की ‘हिम्मत’ और ‘सामथ्र्य’ जुटा सकता है।
वह खुद भी अपनी शर्तो पर जिंदगी जीती हैं और इस बात से खुश हैं कि इन दिनों फिल्म जगत में महिलाएं लाभ पा रही हैं।
‘द डर्टी पिक्चर’ (2011) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजी गईं विद्या ने कहा, “मुझे यह कहते हुए बहुत फख्र महसूस होता है कि मैं लीक से हटकर कुछ फिल्मों का हिस्सा रही हूं। मैं खुशकिस्मत रही हूं।”
विद्या के करियर के सुहाने सफर का ‘इश्किया’ और ‘पा’ जैसी फिल्मों में उनकी बेबाक भूमिकाओं के जरिए आगे बढ़ना जारी है।
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