मांस प्रतिबंध : ठाकरे व जैन नेता मिले, विवाद खत्म

मुंबई, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। देश की आर्थिक राजधानी में रविवार को जैन धर्म के शीर्ष नेताओं ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात की, जिसके साथ ही पर्यूषण पर्व के दौरान मुंबई तथा महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में मांस पर प्रतिबंधों को लेकर उठा विवाद खत्म हो गया।

बांद्रा पूर्व स्थित अपने घर मातोश्री में बैठक के बाद ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, “जहां तक शिवसेना का सवाल है, यह विवाद खत्म हो चुका है। लेकिन हमें इस बात का पता करना होगा कि आखिर इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

उन्होंने कहा कि पर्यूषण के दौरान हमेशा से शहर में मांस पर पाबंदी रही है और इसे लेकर कहीं से कोई शिकायत सामने नहीं आई।

बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएसी) द्वारा मांस के लिए जानवरों को काटने व मांस बेचने पर चार दिनों की पाबंदी के बाद ठाकरे ने आश्चर्य जताते हुए कहा, “अचानक इस साल ऐसा क्या हुआ? आखिर यह विवाद में कैसे बदल गया? इसके पीछे कौन हैं?”

शिवसेना सहित अधिकांश राजनीतिक पार्टियों के हो-हंगामे के बाद बीएमसी ने प्रतिबंध को घटाकर दो दिन कर दिया था।

फिर भी मुद्दे को लेकर पार्टी के रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं लाने का संकेत देते हुए ठाकरे ने स्पष्ट किया कि हर धर्म के लोग अपने धर्म को अपने घर की चहारदीवारी तक ही सीमित रखें।

उन्होंने कहा, “किसी को भी अपने धार्मिक सिद्धांतों को किसी और पर नहीं थोपना चाहिए और इसे अपने घर की चहारदीवारी तक ही सीमित रखना चाहिए।”

ठाणे जिले के मीरा-भयंदर नगर निगम इलाके में जैन मुनियों द्वारा शुरू की गई भूख हड़ताल के मद्देनजर, रविवार को हीरा व्यापारी व फिल्म निर्माता भरत शाह द्वारा यह बैठक आयोजित की गई। मीरा-भयंदर नगर निगम ने मांस पर आठ दिनों की पाबंदी लगाई है।

इसकी देखादेखी बीएमसी, नवी मुंबई, नासिक व अन्य नगर निकायों ने भी की, जिसका कड़ा विरोध हुआ।

शिवसेना व इसके प्रतिद्वंद्वी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) ने पिछले सप्ताह मटन, चिकन व मछली बेचकर अपने खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को चुनौती दी।

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