पटना, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि राज्य के चुनाव में एआईएमआईएम पहली बार चुनाव मैदान में है। इस चुनाव में उनकी लड़ाई उन सांप्रदायिक शक्तियों और अवसरवादी तत्वों से है, जिनके कारण सीमांचल के क्षेत्रों का अब तक विकास नहीं हो पाया है।
पटना, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि राज्य के चुनाव में एआईएमआईएम पहली बार चुनाव मैदान में है। इस चुनाव में उनकी लड़ाई उन सांप्रदायिक शक्तियों और अवसरवादी तत्वों से है, जिनके कारण सीमांचल के क्षेत्रों का अब तक विकास नहीं हो पाया है।
ईमान ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में कहा, “ऐसे तो पूरे बिहार में दलित-मुस्लिमों की स्थिति खराब है परंतु सबसे खराब हाल सीमांचल क्षेत्र में है। उनकी स्थिति में सुधार के लिए सीमांचल की 24 सीटों पर चुनाव लड़ने का पार्टी ने निर्णय लिया है।”
इस आरोप पर कि एआईएमआईएम को बिहार चुनाव में उतारने के पीछे भाजपा का हाथ है, उन्होंने कहा कि जो खुद पापी हैं, वे दूसरों पर पाप का आरोप मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “एआईएमआईएम पिछले कई वषरें से सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ रही है। इसका प्रमाण सदन से लेकर सड़क तक जनता देख चुकी है। यह आरोप लगाने वाले खुद अपना पाप छिपाने की कोशिश में ऐसा कह रहे हैं।”
एआईएमआईएम ने बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिले के 24 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
पूर्व विधायक ईमान कहते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को किशनगंज में रोकने के लिए ही उन्होंने अपना नाम वापस लिया था। उन्होंने बताया कि पार्टी नेता अकबरुद्दीन ओवैसी चार अक्टूबर को बिहार पहुंच रहे हैं। वह कोचाधामन क्षेत्र से चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत करेंगे।
ईमान ने कहा कि सीमांचल के पिछड़ेपन के लिए कोई एक दल दोषी नहीं है। इसके पिछड़ेपन के लिए कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (युनाइटेड) जिम्मेदार हैं। इस क्षेत्र को दिल्ली ने तवज्जो नहीं दी और पटना ने इसका हक मार लिया।
ईमान ने कहा, “क्षेत्र के सभी नेताओं ने वोट के नाम पर राजनीति की, लेकिन आज तक इस क्षेत्र में एक भी मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं खुल सका है। आंकड़े बताते हैं कि छात्रों को जो छात्रवृत्ति मिलती है, उसमें भी इस क्षेत्र के साथ भेदभाव किया गया है।”
उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम के सीमांचल क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद ही यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। यह पार्टी और इस क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को विरोधी नंबर-एक बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी न केवल फिरकापरस्त ताकतों, बल्कि मुसलमानों का इस्तेमाल करने वाले मौकापरस्तों के भी खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि आज कई दल चुनाव में विकास को मुद्दा बता रहे हैं, परंतु गठबंधन कर जातीय समीकरण को साधने में लगे हुए हैं।
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