उन्होंने कहा कि राज्य के आमजन सुरक्षित रहें, यह जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की है, यूएन में आजम खां द्वारा चिट्ठी लिखे जाने पर पाठक ने कहा कि पहले वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर समझ लेते।
प्रदेश प्रवक्ता ने इसे ‘नाकामी अखिलेश सरकार की सवाल मोदी से’ वाला मामला बताया। उन्हांेने कहा कि आखिर उत्तर प्रदेश की खतरनाक स्थिति को नियंत्रण करने की जिम्मेदारी किसकी थी? राज्य के गृह विभाग का भी जिम्मा संभाल रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समय पर घटना को लेकर क्यों नहीं कार्रवाई की।
पाठक ने कहा, “धारा 144 लगे होने के बाद कैसे उसका उल्लंघन होता रहा। जब हालात सामान्य किए जाने की जरूरत थी तो सरकार में बैठे लोग विभेदपूर्ण बयानबाजी क्यों कर रहे हंै। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी वातावरण सामान्य हो, इस दिशा में क्या प्रयास किए गए?”
उन्होंने ने कहा कि आजम खां यूएन में मामला उठाने के पहले बेहतर होता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने उठाते, क्योंकि राज्य के खराब हालात के लिए सबसे बेहतर प्रश्नों का जबाव वही दे सकते हंै। कानून व्यवस्था राज्य का विषय है, और संभवता आजम खां कानून व्यवस्था के विषय को लेकर ही ये बात कह रहे हैं। जिन पर समाधान की जिम्मेदारी है वह राजनैतिक रोटी सेंकने में जुटे हंै। इसलिए सवाल दादरी पर होता है और याद 6 दिसंबर, 1992 के किया जाता है।
पाठक ने कहा कि भाजपा के रवैये की नैतिकता परखने के बजाए सपा नेता अपनी पार्टी के नेताओं की नैतिकता परखें। सरकार बिसाहड़ा कांड में अपनी नाकामी को मुआवजे के मरहम से भरने के बजाय वहां हालात सामान्य बनाने का प्रयास करे। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन किसी का उत्पीड़न न हो।
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