एनजेएसी अधिनियम रद्द, कॉलेजियम प्रणाली से ही न्यायाधीशों की नियुक्ति

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में संविधान के 99वें संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इसे निरस्त कर दिया और उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पुरानी कॉलेजियम प्रणाली को बहाल कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को केंद्र सरकार के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की संविधान पीठ ने एक ‘सामूहिक आदेश’ में कहा कि संविधान का 99वां संशोधन और एनजेएसी अधिनियम असंवैधानिक है।

गौरतलब है कि संविधान का 99वां संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित 1993 की कॉलेजियम प्रणाली के स्थान पर लाया गया था।

न्यायालय ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों एवं न्यायाधीशों के स्थानांतरण से संबंधित जो प्रणाली संविधान संशोधन से पूर्व थी, वही बरकार रहेगी।”

सर्वोच्च न्यायालय ने बार से कॉलेजियम प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव मांगे हैं, जिसकी सुनवाई तीन नवंबर को होगी।

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