भोपाल, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर यहां बुधवार को प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, तब दोनों के बीच कई बार झड़प हो गई।
पंचायत प्रतिनिधि राज्य में पंचायती राज अधिनियम 1993 के मुताबिक, सुविधाएं दिए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रतिनिधि बुधवार को भोपाल के टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान में जमा हुए। सरकार इस आंदोलन को किसी कीमत पर नहीं होने देना चाहती है।
आंदोलन स्थल को मंगलवार की रात में ही पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया, पंडाल उखाड़ दिया गया और बुधवार की सुबह पंचायत प्रतिनिधियों के नेताओं अभय मिश्रा, डी.पी. धाकड़ सहित कई अन्य को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शन के लिए जमा हुए प्रतिनिधियों में धक्का-मुक्की हुई।
आंदोलनकारी नेता अभय मिश्रा का आरोप है कि सरकार उन पर दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। बाहर से आने वाले प्रतिनिधियों को राजधानी में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की है कि जहां भी पुलिस उन्हें रोके, वहीं गिरफ्तारी दे दें।
दूसरी ओर, राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने संवाददाताओं से कहा कि कुछ लोग अधिकारों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें कुछ लोग उकसा रहे हैं। सरकार पंचायत प्रतिनिधियों की कई मांगें मान चुकी है।
भार्गव ने कहा कि सात वर्षो से उनके पास यह विभाग है, मगर आंदोलन अब किया जा रहा है।
पंचायत प्रतिनिधि पूर्व में कई बार अपनी मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन का ऐलान कर चुके थे। सरकार की ओर आश्वासन के बाद उन्होंने अपने आंदोलन को हर बार स्थगित किया। आश्वासन पूरे न होने पर पंचायत प्रतिनिधियों ने 28 अक्टूबर को राजधानी भोपाल में ‘डेरा डालो घेरा डालो आंदोलन’ का ऐलान किया था।
इस आंदोलन के प्रति राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का रुख इसी से समझा जा सकता है कि आंदोलन की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक और रीवा जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया है।
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