कोलकाता, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के विरोध स्वरूप फिल्मकार दिबाकर बनर्जी और अन्य कई लोगों द्वारा विभिन्न सरकारी पुरस्कार और सम्मान लौटाने पर पश्चिम बंगाल में अन्य लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
‘बड़ीवाली’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली सुदिप्ता चक्रवर्ती ने कहा, “फिलहाल मैं पुरस्कार लौटाने के बारे में नहीं सोच रही, लेकिन अगर कोई संयुक्त प्रयास किया जाएगा तो मैं उसका समर्थन करूंगी।”
‘शब्दो’ के निर्देशक कौशिक गांगुली ने कहा, “मैं फिल्मकारों के पुरस्कार लौटाने के फैसले का सम्मान करता हूं। अन्य लोगों का रोष प्रकट करने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन मैं विरोध के लिए फिल्मों या लेखन के तरीके का इस्तेमाल कर सकता हूं।”
गीत ‘ए तुमी केमोन तुमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले रुपांकर बागची ने सवाल उठाते हुए कहा, “पुरस्कार लौटाना क्या विरोध का तरीका है? मुझे ऐसा नहीं लगता।”
जिन फिल्मकारों ने बुधवार को पुरस्कार लौटाए, उनमें आनंद पटवर्धन, दीपांकर बनर्जी, परेश कामदार, निष्ठा जैन, कीर्ति नख्वा, हर्षवर्धन कुलकर्णी, हरि नायर, राकेश शर्मा, इंद्रनील लहिड़ी और लिपिका सिंह दरई शामिल हैं।
फिल्मकारों ने पुणे में विरोध जता रहे फिल्म एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई।
पिछले कुछ महीनों से देश में असहिष्णुता के माहौल के विरोधस्वरूप एफटीआईआई के तीन प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों की पुरस्कार लौटाने की घोषणा के कुछ घंटों के बाद बुधवार को फिल्मकारों ने यह फैसला लिया।
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