मुंबई, 3 नवंबर (आईएएनएस)। शिवसेना ने मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया है कि विधानसभा चुनाव के बाद एक साल में ही लोगों का मन क्यों बदल गया, जो कि महाराष्ट्र के लगभग 60 छोटे-बड़े नगर निकायों के चुनाव परिणामों से स्पष्ट है।
शिव सेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में लिखा है, “राज्य के कई हिस्सों में कांग्रेस-राकांपा ने नगर निकाय चुनाव में काफी अच्छा प्रदर्शन किया। जनता का मन केवल एक साल में इतना क्यों बदल गया? मुख्यमंत्री को इस पर विचार करना चाहिए।”
अक्टूबर 2014 में स्वतंत्र रूप से विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और शिवसेना एक वर्ष से संयुक्त रूप से सत्ता में हैं।
कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (केडीएमसी) चुनाव के नतीजों की ओर इशारा करते हुए शिवसेना ने कहा कि यद्यपि यह चुनौती थी, लेकिन लोगों ने उसे सत्ता की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
122 सदस्यीय नगर निगम के लिए हुए चुनाव में सभी दल स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरे थे। सेना को इसमें 52 सीटें मिलीं हैं, जो कि पूर्ण बहुमत से दस कम है। जबकि भाजपा 42 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है।
संपादकीय में कहा गया है, “अन्य सभी दल सूखे पत्तों की तरह उड़ गए। कांग्रेस को केवल चार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दो सीटें मिली हैं, जबकि वे स्वतंत्र रूप से सत्ता में आने के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे।”
शिवसेना के मुताबिक, “लोगों का मिला-जुला रुख रहा है, लेकिन यह शिवसेना के पक्ष में है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा कल्याण-डोम्बिवली में जीती थी जो कि यकीनन शिवसेना का गढ़ है और स्थानीय निकाय चुनाव के परिणामों से यह फिर से साबित हुआ है।”
हालांकि शिव सेना ने कहा है कि उसने पूरी विनम्रता से नतीजों को स्वीकार किया है और वह केडीएमसी इलाके के विकास के लिए काम करेगी।
कोल्हापुर नगर निगम (केएमसी) के बारे में में शिव सेना ने कहा है कि स्थानीय सहयोगी ‘तरारनी अघाड़ी’ की मदद से भाजपा को कुछ अधिक सीटें जीतने में कामयाब रही है, लेकिन लाख प्रयासों के बावजूद 81 सदस्यीय सदन में राकांपा केवल 15 सीटें और कांग्रेस 27 सीटें ही जीत पाई है।
संपादकीय के मुताबिक, स्पष्ट है कि अगर कांग्रेस और राकांपा हाथ मिला लें तो वे केएमसी की सत्ता हासिल कर सकते हैं।
संपदाकीय के मुताबिक, अन्य 58 नगर परिषदों और ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजों में मिला-जुला परिणाम मिला है।
भाजपा अपने गढ़ बीड़ में हार गई, जबकि राकांपा ने वहां अच्छा प्रदर्शन किया जो कि राज्य शासन-व्यवस्था के लिए सही नहीं है।
शिव सेना को उन नगर निकायों में जीत हासिल हुई है, जहां उसने कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन विदर्भ क्षेत्र ने इस बार भाजपा का साथ छोड़ दिया जो कि पिछले विधानसभा चुनाव में उसके साथ था।
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