अकादमी नहीं सरकार के खिलाफ जताएं गुस्सा : जयंत नार्लीकर

पुणे (महाराष्ट्र), 5 नवंबर (आईएएनएस)। प्रख्यात तारा-भौतिकविद् तथा साहित्यकार जयंत नार्लीकर ने देश में बढ़ रही असहिष्णुता के विरोध में पुरस्कार लौटाने की घटनाओं पर सरकार को आड़े हाथ लिया है।

उन्होंने कहा कि कन्नड़ साहित्यकार एम.एम.कलबुर्गी की हत्या सहित असहिष्णुता की कई घटनाएं देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के संकेत हैं, जिसके लिए साहित्य अकादमी नही, सरकार जिम्मेदार है।

नार्लीकर ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 30 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा, “इसलिए लोगों का रोष कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ होना चाहिए न कि साहित्य अकादमी के खिलाफ।”

उन्होंने कहा, “साहित्य अकादमी ने भी इस तरह की घटनाओं पर क्षोभ जताया है। पुरस्कार पाने वाले लोग देश को प्रमुख योगदान देने वाले लोगों में से हैं और इसीलिए वे भीड़ से अलग हैं।”

उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को कर्नाटक के धारवाड़ में कलबुर्गी की हत्या पर समाज के हर वर्ग के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई, जबकि साहित्य अकादमी ने काफी देर से 30 सितंबर को बेंगलुरू में एक शोकसभा का आयोजन किया।

पुणे के नार्लीकर को साल 2014 में मराठी भाषा में उनकी आत्मकथा ‘चार नागरंताले मजे विश्व’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया।

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