नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को मोदी सरकार से कहा कि वह नेपाल को डराना-धमकाना बंद करे। पार्टी ने नेपाल में जरूरी सामानों की बेहद किल्लत का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल की नाकेबंदी को खत्म किया जाए।
नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को मोदी सरकार से कहा कि वह नेपाल को डराना-धमकाना बंद करे। पार्टी ने नेपाल में जरूरी सामानों की बेहद किल्लत का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल की नाकेबंदी को खत्म किया जाए।
माकपा के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय में लिखा गया है, “मोदी सरकार को डराने-धमकाने की नीति छोड़ देनी चाहिए। सरकार को नेपाल सरकार से सलाह मशविरा कर सीमा पर लगी बाधाओं को तुरंत हटाना चाहिए।”
संपादकीय में कहा गया है कि नेपाल से विवाद की सरकार की नीति की वजह से ‘भारत और नेपाल के रिश्तों में अभूतपूर्व रूप से दरार आई है।’
संपादकीय में कहा गया है कि 20 सितंबर को नेपाल में अपनाए गए संविधान के प्रति नकारात्मक नजरिया दिखाने के बाद भाजपा सरकार ने तनाव को और बढ़ाने का काम किया है। दो महीने से नेपाल की सीमा पर नाकेबंदी की गई है।
संपादकीय में कहा गया है, “मधेसी आंदोलन को मोदी सरकार समर्थन दे रही है। रक्सौल-बीरगंज समेत भारत-नेपाल के कई रास्तों पर नाकेबंदी है। इससे नेपाल में जरूरी चीजों की बड़े पैमाने पर कमी आ गई है।”
संपादकीय में कहा गया है कि सरकार कह रही है कि नाकेबंदी उसने नहीं की है। जबकि, हाल यह है कि पूर्वी नेपाल की उस सीमा को भी गैरआधिकारिक रूप से सील कर दिया गया है जहां कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा है।
इसमें कहा गया है कि मोदी सरकार की यह नीति राष्ट्रीय प्रभुत्ववाद की सोच का नतीजा है। इसके अलावा भाजपा-आरएसएस नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किए जाने से भी नाराज हैं।
संपादकीय में लिखा गया है कि मधेसी और अन्य जनजातियों के मसले नेपाल में ही राजनीतिक रूप से सुलझाए जाएंगे। भारत सरकार को मधेसियों को वार्ता के लिए कहना चाहिए।
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