एकान्त प्रिय चौहान
एकान्त प्रिय चौहान
रायपुर, 11 नवंबर (आईएएनएस/वीएनएस)। दिवाली यूं तो रोशनी का त्योहार है। हर ओर रोशनी और आतिशबाजी से पूरा देश गुंजायमान है। लेकिन आतिशबाजी के अपने खतरे भी हैं और जब पूरा शहर दिवाली की धूम में डूबा हुआ तो कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो नि:स्वार्थ भाव से लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। इन्हीं में से एक हैं राजधानी के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र। डॉ. मिश्र अविरल 1991 से दिवाली की आतिशबाजी में झुलसे लोगों के लिए नि:शुल्क उपचार के लिए शिविर लगाते हैं।
इस वर्ष भी उनका यह शिविर आज (11 नवंबर) की शाम से गुरुवार (12 नवंबर) की रात्रि तक जारी रहेगा। इसके साथ ही डॉ. मिश्र पटाखे जलाने के तरीके और झुलसने पर तात्कालिक उपचार बताकर लोगों को जागरूक करते रहे हैं। वे अब तक लगभग 850 से अधिक लोगों का नि:शुल्क उपचार दिवाली के अवसर पर कर चुके हंै। इस शिविर की अंचल में एक विशिष्ट पहचान बन चुकी है।
डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि आंखों में लगी चोटों के नि:शुल्क परीक्षण एवं उपचार के लिए दो दिवसीय नि: शुल्क नेत्र शिविर लगाया जा रहा है। यह शिविर फूल चौक स्थित रायपुर नेत्र चिकित्सालय में 11 नवम्बर की शाम से 12 नवम्बर की रात्रि तक संचालित होगा।
डॉ. मिश्र ने बताया कि दीपावली में चिकित्सकों की अनुपलब्धता व मरीजों को होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह शिविर लगातार पच्चीसवें वर्ष आयोजित किया जा रहा है। पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर सन 1991 में इस प्रकार के शिविर की शुरूआत की गई थी ताकि पटाखों के कारण जलने व आंख को होने वाली चोटों के त्वरित एवं नि: शुल्क उपचार की सुविधा मरीजों को प्राप्त हो सके।
पिछले 24 वर्षो में करीब 850 से अधिक ऐसे मरीजों का उपचार एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस शिविर की अंचल में एक विशिष्ट पहचान बन चुकी है।
सावधानी से चलाएं पटाखे
डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि दीपावली ज्योति पर्व है, नेत्र ज्योति अनमोल है, लेकिन असावधानी से चलाए गए पटाखे किसी भी व्यक्ति की नेत्र ज्योति के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि दिवाली में पटाखों को लापरवाही से न चलाएं, बल्कि अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। बम, अनारदाना, रॉकेट आदि चलाते समय पर्याप्त दूरी व सावधानी रखें।
उन्होंने कहा कि पटाखों को अधिक झुककर न चलाएं, क्योंकि पटाखे कई बार अपेक्षाकृत जल्दी फूट जाते हैं व बचाव का समय नहीं मिलता। पटाखे जलाकर सड़क पर न उछालें। छोटे बच्चों को जलते हुए दिये व मोमबत्ती के पास अकेला न छोड़ें। बच्चों को अकेले पटाखें न चलाने दें। पटाखा शरीर के नजदीक फटने से हाथ, चेहरा, आंखें, कपड़ों के झुलसने का खतरा रहता है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि सिर के बाल, भौंहे, बरौनियां, पलकें, आंखों का भीतरी भाग साधारण से गंभीर रूप से झुलस सकता। पटाखा बनाने में गंधक, पोटाश, कोयला, कंकड़, सुतली, कपड़े, कागज का उपयोग होता है। आंख के नजदीक पटाखा फूटने से आंखों में गैस, बारूद, कोयला चला जाता है। जिससे पलकें, आंखों की झिल्ली, कंजेक्टाइवा, पुतली व अन्दरूनी हिस्से को साधारण से गंभीर रूप से क्षति पहुंच सकती है।
नि: शुल्क परामर्श
उन्होंने कहा कि बड़े पटाखों से आंख में चोट से आंख में खून उतरने, मोतियाबिंद होने तथा आंख का परदा उखड़ने तक की आशंका हो सकती है। आहत व्यक्ति आंखों में तेज जलन आना, दर्द, धुंधलापन, कसक की शिकायतें करता है। यदि आंखों के पास कोई पटाखा फूट जावे तथा इस प्रकार की तकलीफें हो तो आंखों को रगड़ें नहीं बल्कि साफ पानी से चेहरे व आंखों को धो लें ताकि आंखों व चेहरे पर लगा गर्म, विघटित पदार्थ धुल जाए।
नि: शुल्क परामर्श व उपचार के लिये फोन नंबर 4026101, 98274-00859 (मो.) पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।
dharmpath.com dharmpath