नई दिल्ली, 17 नवंबर (आईएएनएस)। विश्व नीमोनिया दिवस के अवसर पर जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ स्थित इंटरनेशनल वैक्सीन ऐक्सेस सेंटर (आइवीएसी) ने अपनी वार्षिक रपट ‘नीमोनिया एंड डायरिया प्रोग्रेस’ को जारी किया। इस वर्ष का विषय ‘सस्टेनेबल प्रोग्रेस इन द पोस्ट-2015 एरा’ है।
रपट के मुताबिक, नीमोनिया एवं अतिसार से होने वाली बाल मृत्यु की संख्या के मामले में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है।
रपट में नीमोनिया एवं अतिसार के भारी दबाव का सामना करने वाले 15 देशों की प्रगति की चर्चा की गई है। इस दिशा में प्रगति एवं प्रतिरक्षीकरण को गति देने के बावजूद भारत में नीमोनिया एवं अतिसार से मरने वाले पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर शताब्दी के विकास लक्ष्यों को हासिल करने एवं बाल मृत्यु के मामले कम करने का प्रयास किया गया है, लेकिन ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2015 में दुनिया भर में 59 लाख बच्चे अपने पांचवें जन्मदिन पर पहुंचने के पहले ही मृत्यु के आगोश में समा जाएंगे।
जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर केट ओ ब्रायन ने कहा, “विश्व नीमोनिया दिवस के अवसर पर हम दुनिया भर में नीमोनिया की रोकथाम करने एवं बच्चों की मृत्यु को कम करने के प्रयास में होने वाली प्रगति को सेलिब्रेट कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “इस वर्ष की नीमोनिया एवं अतिसार रपट एक स्थायित्वपूर्ण प्रगति की आवश्यकता को प्रदर्शित करती है, क्योंकि हम 2015 में स्थायित्वपूर्ण विकास के लक्ष्यों को हासिल करने से आगे बढ़ कर एक नया अध्याय लिखने की तैयारी कर रहे हैं। इसका तात्पर्य यह है कि नीमोनिया एवं अतिसार से होने वाली अनावश्यक मृत्यु को रोकने के लिए टीकों, नैदानिक उपकरणों एवं औषधियों की उपलब्धता में वृद्धि हुई है।”
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