कोलकाता, 23 नवंबर (आईएएनएस)। ्नराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), दुर्गापुर में बीते बुधवार को कथित तौर पर संस्थान की लापरवाही से एक विद्यार्थी की मौत के बाद संस्थान में बवाल शुरू हो गया। हालात बिगड़ने पर मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।
मंत्रालय के अधिकारी सोमवार को संस्थान का दौरा कर रहे हैं, जो विद्यार्थियों के उस आरोप की जांच करेंगे, जिसके मुताबिक संस्थान में बीते एक साल के दौरान प्रसेनजीत को मिलाकर अब तक कुल पांच विद्यार्थियों की मौत हो चुकी है। पहले हुई चार मौतों को अस्वाभिक करार दिया गया था, जबकि प्रसेनजीत की मौत को संस्थान ने अस्वाभाविक मानने से इंकार किया है।
प्रसेनजीत के सहपाठियों ने कहा है कि वह चौथे साल का इंजीनियरिंग छात्र था और बीते दो दिनों से सिरदर्द से पीड़ित था, जिसके कारण वह सेमेस्टर का पर्चा नहीं दे पाया था। बार-बार रिपोर्ट करने के बाद भी एनआईटी की चिकित्सा इकाई ने न तो उसकी बद्तर होती स्थिति की ओर ध्यान दिया और न ही चिकित्सा के लिए उसे बाहर किसी अस्पताल में भर्ती कराया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा इकाई की लापरवाही के कारण 18 नवंबर को उसकी मौत हो गई।
विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि एनआईटी के निदेशक तारकेश्वर कुमार ने उनसे बातचीत करने से इंकार कर दिया और जब उन्होंने 18 नवंबर को प्रसेनजीत की मौत और विरोध-प्रदर्शन के मुद्दे पर बातचीत के लिए चीफ वार्डन से मिलना चाहा, तो निदेशक ने 150 से अधिक दंगा रोधी पुलिस व अर्धसैनिक बलों को बुला लिया।
विद्यार्थी विरोध-प्रदर्शन, कक्षाओं का बहिष्कार व जस्टिस फॉर प्रसेनजीत हैशटैग के नाम से एक ऑनलाइन अभियान चला रहे हैं।
आंदोलनकारी विद्यार्थियों को प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 21 नवंबर को सोशल मीडिया पर कहा, “संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।”
ईरानी ने रविवार को ट्विटर पर कहा, “मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारी कल (सोमवार) एनआईटी दुर्गापुर जाएंगे।”
वहीं संस्थान ने रविवार को कहा कि घटना की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसकी रपट एक सप्ताह के अंदर आ जाएगी।
आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने कहा, “बीते एक साल में कैंपस में पांच से अधिक मौतें हो चुकी हैं और हर बार अस्वाभाविक मौत कहकर मामले को दबा दिया जाता है।”
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