शिमला, 29 नवंबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र सोमवार से धर्मशाला शहर में शुरूहो रहा है। इस सत्र में विपक्षी दल भाजपा सत्तारूढ़ कांग्रेस को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेर सकती है, जिससे यह सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं।
दूसरी और सरकार पिछले तीन साल की अपनी उपलब्धियों को उजागर करने की कोशिश करेगी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने आईएएनएस से कहा, “हम भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों पर मुख्यमंत्री को पद से हटाने के मुख्य मुद्दे को नहीं छोड़ेंगे।”
उन्होंने कहा कि यह मांग विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा, “हम धर्मशाला में दो दिसंबर को विधानसभा के बाहर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने जा रहे हैं।”
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसी महीने मुख्यमंत्री के खिलाफ मनी लॉडरिंग का मामला दर्ज किया है, जिसके बाद वह मुश्किलों में घिर गए हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 20 नवंबर को तीन राज्यों में छापेमारी की थी। वीरभद्र को 27 नवंबर को सम्मन भी जारी किया गया था।
वीरभद्र के खिलाफ सीबीआई द्वारा सितंबर में दर्ज एक आपराधिक मामले को संज्ञान में लेते हुए ईडी ने उनके खिलाफ मनी लॉन्डरिंग रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप लगाए हैं।
संसदीय मामलों के मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आईएएनएस से कहा, “हमारी सरकार 25 दिसंबर को अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही है। विधानसभा में पहली बार अपनी उपलब्धियां उजागर करेंगे।”
इसके अलावा उन्होंने कहा कि वह किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हैं।
वहीं भाजपा नेताओं ने कहा कि वह आक्रामक तरीके से विधानसभा में सभी मुद्दे उठाएंगे।
भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा, “सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में मुख्यमंत्री के आवासों(दिल्ली और शिमला में) पर छापेमारी की है। दूसरा मामला ईडी ने दर्ज किया है। यह निश्चित रूप से हमारा मूल मुद्दा होगा।”
उन्होंने कहा कि दिन-प्रतिदिन की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
वहीं भारद्वाज ने कहा, “आप पूरे राज्य में सड़कों की बिगड़ती हालत देख रहे हैं। हम विधानसभा में इस मुद्दे को भी उठाएंगे।”
धर्मशाला में आयोजित पांच-दिवसीय विधानसभा सत्र में विधायकों की तरफ से 200 तारांकित और 81 गैरतारांकित प्रश्न होंगे।
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