पणजी, 30 नवंबर (आईएएनएस)। 46वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (इफ्फी) में इजरायली फिल्मकार अमोस गितायी को रेट्रोस्पेक्टिव सम्मान से नवाजा गया है। इस अवसर पर उनकी फिल्म ‘राबिन- द लास्ट डे’ का प्रदर्शन किया गया।
रेट्रोस्पेक्टिव खंड के उद्घाटन के अवसर पर अपने सम्बोधन में अमोस गितायी ने कहा कि सिनेमा सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने फिल्मकार से ज्यादा, एक नागरिक के रूप में फिल्म का निर्माण किया है।
इस खंड में अमोस गितायी की 10 फिल्में प्रदर्शित की गईं। अन्य फिल्मों में आलिया, बर्लिन- येरूशलम, देवारिम, एस्थर, गोलेम, द स्पिरिट ऑफ एक्जाइल, कादोश, लुलाबी टू माई फादर, त्सीली, योम योम शामिल हैं।
अमोस गितायी का जन्म 11 अक्टूबर, 1950 को हाइफा में हुआ था। उन्होंने हाइफा के इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नॉलोजी से वास्तुकार के रूप में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की थी और कैलिफोर्निया के बार्कले विश्वविद्यालय से वास्तुकला में पीएचडी की थी।
उन्होंने 1973 में योम किप्पोर युद्ध में भाग लिया था, जिसमें वह घायल हो गए थे। 1980 में निर्देशन के प्रति आकर्षित होकर वह हाउस के निर्माण के साथ व्यावसायिक फिल्मकार बन गए।
उन्होंने फिक्शन और वृत्तचित्र सहित कई फिल्मों का निर्माण किया, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
‘राबिन- द लास्ट डे’ एक दिलचस्प डॉक्यू-ड्रामा है, जिसमें इजरायल के प्रधानमंत्री त्यिझाक रॉबिन की हत्या से पूर्व और बाद की परिस्थितियों को दर्शाया गया है। फिल्म का कथानक है- 4 नवम्बर, 1995, शनिवार की शाम को तेल-अवीव के केंद्र में एक राजनीतिक रैली के अंत में एक यहूदी छात्र ने तीन गोलियां दागकर प्रधानमंत्री त्यिझाक रॉबिन की हत्या कर दी थी।
इस घटना को हुए 20 साल बीत चुके हैं, शांति की संभावनाएं 90 के दशक और सामान्य स्थिति के सपने के समान लुप्त हो चुकी हैं। अधिकांश इजरायलियों के लिए रॉबिन की मौत, लोकतंत्र के लिए तो आघात थी ही, साथ ही उसने इजरायल-फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की किसी भी सम्भावना को भी समाप्त कर दिया।
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