एक सच्चाई यह भी है कि इस गांव में आजादी के बाद पहली बार किसी सरकारी अफसर ने कदम रखा है।
दौरे के दौरान मुख्य सचिव ने नक्सल मोर्चे पर पुलिस अभियान के साथ ही सुकमा और कोंटा में हुए विकास कार्यो का जायजा लिया। मुख्य सचिव के साथ प्रदेश के डीजीपी ए.एन. उपाध्याय व बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी भी थे।
किस्टाराम 800 से अधिक आबादी वाला बस्तर क्षेत्र का बड़ा गांव है। ग्रामीण नक्सलियों के आतंक से उकता चुके लोग अमन-चैन की जिंदगी जीना चाह रहे हैं। पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान से ग्रामीणों की आस बंधी है। नक्सलियों ने इस गांव को पूरी दुनिया से काट रखा है।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां नक्सलियों की मर्जी के बगैर न तो कोई आ सकता है और न ही किसी को किसी वाहन का उपयोग करने दिया जाता है। राशन लेने के लिए भी ग्रामीणों को 30 किलोमीटर दूर मरइगुड़ा जाना पड़ता है।
मुख्य सचिव ने ग्रामीणों को बताया कि पुलिस की पहुंच होने के बाद अब इस गांव की सड़क बनाने में आसानी होगी।
हाल में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने केंद्र सरकार से बस्तर के दो दुरूह क्षेत्रों के लिए सड़क की मंजूरी ली है। इसमें करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से किस्टाराम से पेंडागुड़म तक सड़क बनाई जाएगी।
मुख्य सचिव ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया, “आप सबको करंट मिल जाएंगा..किस्टाराम में बिजली पहुंचाने के लिए आंध्रप्रदेश से बिजली खरीदी जाएगी। मरइगुड़ा में भी आंध्र से बिजली लेकर दी जा रही है।”
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