नई दिल्ली, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। देश के सामने चुनौती मौजूद रहने की चेतावनी देते हुए सरकार ने शुक्रवार को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए विकास दर अनुमान 8.1-8.5 फीसदी से घटाकर 7-7.5 फीसदी कर दिया है। इसका शेयर बाजारों पर विपरीत प्रभाव पड़ा और मूख्य सूचकांक एक फीसदी से अधिक लुढ़क गए।
संसद में पेश की गई मध्यावधिक समीक्षा में वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि विनिवेश के मोर्चे पर कुछ विफलताओं के बावजूद मौजूदा वित्त वर्ष में वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल हो जाएगा। मंत्रालय ने हालांकि अगले वित्त वर्ष के लिए उतनी सकारात्मक राय नहीं दी है।
मुख्य रूप से मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम द्वारा तैयार समीक्षा रपट में कहा गया है, “अर्थव्यवस्था में तेजी आई है, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार को खर्च में कोई बड़ी कटौती किए बिना ही 3.9 फीसदी वित्तीय घाटा का लक्ष्य पूरा हो जाने का अनुमान है।”
फरवरी में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में 8.1-8.5 फीसदी विकास दर का अनुमान जताया गया था। मौजूदा कारोबारी साल की प्रथम और दूसरी तिमाही में हालांकि विकास दर क्रमश: सात फीसदी और 7.4 फीसदी रही है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा पेश समीक्षा में कहा गया है, “अनुमान से कम विकास दर रहने से वित्तीय घाटे का लक्ष्य 0.2 फीसदी बढ़ जाएगा।”
समीक्षा के मुताबिक, “विपरीत बाजार परिस्थितियों में विनिवेश से कम आय होने के कारण चुनौती और कठिन हो जाएगी। सरकार की विनिवेश सूची में अधिकतर कंपनियां कमोडिटी क्षेत्र की हैं, जिसमें अभी सुस्ती चल रही है।”
समीक्षा में कहा गया है, “विकास दर का सिर्फ निजी खपत और सरकारी खर्च पर निर्भर होना चिंताजनक है। वेतन वृद्धि पर सरकारी खर्च बढ़ने से अगले कारोबारी साल की योजना प्रभावित होगी।”
मध्यावधि रपट में कर वसूली अच्छी रहने की बात कही गई है और बताया गया है कि प्रत्यक्ष कर के मुकाबले अप्रत्यक्ष कर की अधिक वसूली हुई है।
रपट में निर्यात को लेकर चिंता दिखाई गई है, जिसमें गत 12 महीने से गिरावट जारी है। रपट के मुताबिक, इसकी वजह से भी विकास दर घट रही है। रपट में हालांकि कहा गया है कि आने वाले महीनों में इसमें सुधार होगा।
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