रांची, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। झारखंड की नदियों में फैलते प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक समिति गठित करने का फैसला किया है।
कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा, “इस्पात और ऊर्जा संयंत्रों से नदियों में फैलते प्रदूषण को रोकने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।”
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक बिरंचि नारायण ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया।
बिरंचि ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या यह सही है कि कई संयंत्र नदियों के तटों पर स्थित है। कारखानों के कचरे को बिना शोधित किए ही नदियों में बहा दिया जाता है।”
एक लिखित जवाब में राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि बड़े संयंत्र नदियों के तटों पर स्थित हैं और उनसे निकलने वाले कचरे को नदियों और खासतौर पर दामोदर नदी में बहा दिया जाता है।
तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड (टीवीएनएल) और पत्रातु थर्मल पॉवर प्लांट्स स्टेशन (पीटीपीएस) के राख कुंडों को दामोदर नदी में बहा दिया जाता है, जिसके कारण पानी में अघुलनशील प्रदूषक तत्वों की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई।
बिरंचि ने कहा, “राज्य सरकार को इस मुद्दे पर विशिष्ट जांच दल (एसआईटी) गठित करना चाहिए और नदियों को प्रदूषित करने वाले संयंत्रों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और जुर्माना लगाना चाहिए।”
सत्तारूढ़ दल के कुछ सदस्यों ने कहा कि केंद्र सरकार के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के इस्पात संयंत्र सही प्रकार से काम नहीं कर रहे।
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