लखनऊ, 31 दिसंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जगमोहन यादव गुरुवार को सेवानिवृत्त हो गए। इस मौके पर एक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत नेतृत्व मिले तो उत्तर प्रदेश की पुलिस बेहतर परिणाम दे सकती है।
उन्होंने कहा कि डीजीपी के रूप में छह माह के कार्यकाल में पुलिस, पीएसी व होमगार्ड्स पर उनका भरोसा और दृढ़ हुआ है।
जगमोहन यादव लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस की विभिन्न शाखाओं के जवानों की विदाई परेड देखकर काफी भावुक हो गए।
उन्होंने कहा, “पिछले छह माह के भीतर पंचायत चुनाव और विभिन्न त्योहारों को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाकर पुलिस ने उत्कृष्ट कार्य किया है। इसका सारा श्रेय वह पुलिस, पीएसी व होमगार्ड के जवानों को देते हैं। जवानों ने बिना आराम किए छह माह तक काम करके उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौतियों को आसान कर दिया।”
32 वर्षो की पुलिस सेवा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह गांव के रहने वाले हैं और लगातार गांव से जुड़े भी रहे। उन्होंने लगातार महसूस किया कि संवेदनशीलता में कमी आने से समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि शिकायतों की जांच साल दर साल चलती रहती है। इसी तरह विभागीय समस्याओं के निपटारे में भी संवेदनशीलता की कमी दिखती है। ज्यादातर मामलों का निपटारा तब किया जाता है, जब हाईकोर्ट में अवमानना की स्थिति आती है।
जगमोहन यादव ने कहा कि विभागीय कर्मचारी सुनवाई न होने पर ही नेताओं के पास सिफारिश के लिए जाता है। यदि अधिकारी अपना काम ठीक से करें, तो न्यायालयों में मुकदमे और नेताओं की दखल कम हो जाएगी।
डीजीपी ने नए आईपीएस अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि उनमें वरिष्ठों के प्रति सम्मान कम हो रहा है। कई पुलिस कप्तान तो एडीजी तक के फोन नहीं उठाते और न ही वापस फोन करते हैं। यह अशोभनीय है। पुलिस में सम्मान की परंपरा को बनाए रखना होगा।
उन्होंने पुराने और गरिमापूर्ण ढंग से पुलिस सप्ताह मनाए जाने की परंपरा फिर से शुरू न करा पाने पर अफसोस जताया।
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