बस्तर के आईजी एसआरपी कल्लूरी ने छात्रों की रिहाई की पुष्टि की है। तीनों छात्र चिंतलनार में 201 कोबरा बटालियन में हैं। शांतिदूतों को नक्सलियों द्वारा अगवा किए जाने की यह पहली घटना है।
आईजी कल्लूरी ने छात्रों के अपहरण की पुष्टि करते हुए कहा कि इस वारदात को नक्सली कमांडर पापाराव ने अंजाम दिया है।
कल्लूरी के अनुसार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा राज्य के नक्सल क्षेत्रों में शांति के लिए पुणे में अध्ययनरत आदर्श पाटिल, विलास वलाके और श्रीकृष्ण शेवाले नाम के छात्र अपने दो अन्य सहपाठियों के साथ भारत जोड़ो अभियान के लिए निकले थे।
सभी छात्र 20 दिसंबर 2015 को पुणे से रवाना हुए थे। इस दल को बीजापुर जिले में महाराष्ट्र से लगी सीमा से छत्तीसगढ़ प्रवेश कर भैरमगढ़, दंतेवाड़ा, सुकमा होते हुए ओडिशा के कालाहांडी, मलकानगिरी के रास्ते 10 जनवरी को बालीमेला पहुंचना था। कुटरू के रास्ते छत्तीसगढ़ पहुंचे युवा छात्रों की यह शांति यात्रा बीते दिन बीजापुर जिले के बासागुड़ा पहुंची थी।
कल्लूरी ने बताया कि नक्सलियों ने शांतिदूतों को शनिवार शाम को बासागुड़ा से अगुवा किया गया था और उन्होंने फोन के माध्यम से छात्रों के परिजनों से संपर्क भी साधा है।
घटना की सूचना मिलते ही बस्तर के आईजी ने छात्रों के मोबाइल फोन लोकेशन ट्रेस करने के लिए टीम गठित की।
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